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28 साल से बंद पड़ा है यह अस्पताल

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Mar 12 2018 7:27PM
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कुशीनगर. आम आदमी को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की बातें तो बहुत होती हैं लेकिन सच के धरातल पर कुछ भी नहीं होता. योगी सरकार के स्वास्थ्य सम्बन्धी सभी दावे खोखला साबित हो रहे हैं. सरकार द्वारा फरमान जारी तो ज़रूर किया जा रहा है लेकिन इनके नुमाइंडे इस पर पानी फेर रहे हैं. ऐसा ही मामला कुशीनगर जनपद के खड्डा विकास खण्ड के तिनबरदाहा से प्रकाश में आया है. जहां स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित लोग अपनी व्यथा किसको सुनाएँ यह किसी को समझ नहीं आ रहा है.

कुछ दिनों पहले बना अस्पताल खुद ही बीमार हो गया है. यहाँ तक कि अस्पताल के भवन खँडहर में तब्दील हो गए हैं लेकिन इसकी मरम्मत कर डाक्टर की तैनाती नहीं हो पा रही है. बिहार सीमा पर बसा तिनबरदाहा न्याय पंचायत इसका जीता जागता उदाहरण है. इस पिछड़े इलाके के लोगों को इलाज की सुविधा देने के लिए अस्पताल तो बना लेकिन 28 वर्षों से यहाँ कोई डॉक्टर नहीं है. अस्पताल परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ियाँ उग गई हैं और अस्पताल भवन जर्जर होकर ढह रहा है.

आसपास के लोगों की मानें तो बीच-बीच में ग्रामीण इसकी सफाई खुद ही करते हैं लेकिन बार-बार शिकायत करने के बाद भी इसकी सुधि कोई नहीं लेता. कुशीनगर जनपद के खड्डा तहसील अंतर्गत स्थित तिनबरदाहा न्याय पंचायत देश और प्रदेश के अंतिम छोर की बिहार सीमा पर बसा हुआ है. यह न्याय पंचायत जिले के अति पिछड़े इलाकों में से माना जाता है. यहाँ के लोगों को इलाज की सुविधा देने के लिए 1985 में जिला पंचायत द्वारा एक अस्पताल का निर्माण कराया गया. डॉक्टर सहित सभी ज़रूरी कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई. लगभग 5 वर्षों तक सब कुछ ठीक-ठाक चलता रहा. इसके बाद इस अस्पताल की दुर्दशा शुरू हो गई. सभी कर्मचारियों का यहाँ से तबादला हो गया और उसके बाद किसी की तैनाती नहीं हुई.

लगभग 28 वर्षों से यह अस्पताल बंद पड़ा है. परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ियाँ उग आई हैं और भवन खंडहर में तब्दील होने लगा है. अस्पताल के बंद होने से लगभग 20 हजार लोगों को दवा के लिए जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद ही चिकित्सा सुविधा मिल पाती है. ऐसे में लोग बीमारियों का उचित ईलाज नहीं करा पाते हैं और यह बीमारी भयंकर बीमारी का रूप ले लेती है. जिससे अंत में गोरखपुर मेडिकल कालेज जाना पद जाता है. रात में यदि किसी की तबियत ख़राब हो जाती है तो उसका इलाज होना मुश्किल हो जाता है.

यही नहीं लोग बताते हैं कि इस अस्पताल के बंद होने के बाद से अब तक ईलाज के आभाव में सैकड़ों बच्चे , बूढ़े व जवान महिला-पुरुष दम तोड़ चुके हैं. राजनेताओं से लेकर अधिकारियों तक इसकी लिखित शिकायत करने के बाद भी इसका संज्ञान कोई नहीं लेता है.


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