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स्मार्ट सिटी योजना : दावे बड़े पर काम सुस्त

Reported by nationalvoice , Edited by avinash , Last Updated: Mar 27 2018 3:33PM
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राजेंद्र कुमार :
"बनारस बदलते भारत की तस्वीर है। यह शहर अपनी स्पिरिचुएलिटी के साथ स्मार्ट सिटी की ओर बढ़ रहा है।" यह दावा देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने 26 मार्च को अपने बनारस  दौरे के दौरान भले ही किया है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे पसंदीदा 'स्मार्ट सिटी परियोजना' कछुआ चाल चल रही है। यह कोई आरोप नहीं हकीकत है।


बीजेपी सरकार के इस फ्लैगशिप प्रोजेक्ट को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर अभिषेक मिश्र ने एक ट्वीट कर स्मार्ट सिटी परियोजना की सुस्त रफ्तार पर तंज किया है। प्रो.मिश्र ने लिखा है - "प्रधानमंत्री मोदी
ने जिस स्मार्ट सिटी योजना का इतना ढिंढोरा पीटा उसकी हकीकत ये है कि इस योजना में आवंटित रकम का सिर्फ 1.8 फीसदी ही इस्तेमाल हो सका है।" "संसदीय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक 1.5 बिलियन डॉलर में से सिर्फ 28 मिलियन डॉलर ही अब तक खर्च हुए।"


ढाई साल पहले शुरू की गई इस योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से मुहैया कराई गई रकम का इतना कम हिस्सा खर्च होना यह बताता है कि उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में 99 शहरों में स्मार्ट सिटी योजना कछुआ गति से आगे बढ़ रही है। हालांकि वर्ष 2015 में स्मार्ट सिटी योजना शुरू करते हुए यह दावा किया गया था कि पांच वर्षों के भीतर योजना में शामिल शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित कर दिया जाएगा। तब यह भी कहा गया था कि मोदी सरकार ने चुनाव के पहले किया गया अपना वायदा निभाया है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले ही नरेंद्र मोदी ने अपने चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में डिवेलपमेंट का जो अजेंडा जनता के सामने रखा था, उसमें 100 शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करना सबसे प्रमुख था। जिसके तहत ही इसे शुरू किया गया। तब यह उम्मीद भी जतायी गई थी कि जब 2019 में लोकसभा चुनाव होंगे तो ये स्मार्ट सिटी लोगों को आकर्षित करने के साथ ही ये सरकार की उपलब्धि के रूप में सामने होंगी।


फिर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह योजना आज सुस्ती का शिकार है। स्मार्ट सिटी   योजना की इस हालत को देखते हुए आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय से जुड़ी संसद की  स्टैंडिंग समिति ने भी चिंता जतायी है। इस समिति ने स्मार्ट सिटी योजना की प्रगति संबंधी ब्यौरे को देखते हुए यह पाया कि स्मार्ट सिटी के लिए केंद्र की ओर से 9,943.22 करोड़  रुपये जारी किए गए, लेकिन इनमें से सिर्फ 182.62 करोड़ रुपये ही खर्च किए जा सके हैं।
इसके बाद ही समिति ने सरकार से कहा है कि इस योजना की राह में आ रही बाधाओं को  दूर किया जाए। अन्यथा इस योजना का असर वर्ष 2019 में नहीं दिखेगा। समिति के इस कथन ने केंद्र सरकार की चिंता बढ़ा दी है।  क्योंकि बीते ढ़ाई सालों में स्मार्ट सिटी के लिए जिन शहरों में पैसा जारी हुआ है, उनमें आधे से भी अधिक शहर ऐसे हैं जहां बहुत कम धनराशि खर्च की गई है।

यूपी में स्मार्ट सिटी के रूप में चयनित शहर
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट सिटी के रूप में लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, झांसी, इलाहाबाद, बरेली, मुरादाबाद तथा सहारनपुर का चयन किया गया है। जिसके तहत पहले चरण में चयनित हुए शहरों के लिए 529 करोड़ रुपए प्रदेश को मिले थे, जिनमें से करीब चार करोड़ रुपए ही खर्च हुए। स्मार्ट सिटी के लिए मिली धनराशि में से आगरा में अब तक 111 करोड़ रुपये में से 54 लाख रुपये खर्च हुए हैं, तो कानपुर में 111 करोड़ में से सवा तीन करोड़ रुपये। लखनऊ को स्मार्ट बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 196 करोड़ रुपये दिए हैं, लेकिन  खर्च हुए हैं 48 लाख रुपये। खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी को भी 111 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं, लेकिन वहां भी इनमें से महज दो करोड़ रुपये खर्च हुए   हैं। यूपी में स्मार्ट सिटी के लिए मिली राशि के उक्त खर्च पर समिति ने चिंता जताई है।

क्या है स्मार्ट सिटी योजना
स्मार्ट सिटी योजना भारत सरकार द्वारा संचालित केन्द्र की मदद से चलने वाली योजना है, जिसके तहत नागरिकों की आकांक्षाओं, आवश्यकताओं व परिस्थितियों के अनुरूप शहर को आदर्श रूप में विकसित करना है। इसका उद्देश्य उन प्रमुख शहरों को प्रोत्साहित करना है,   जो अपने नागरिकों को गुणवत्तापरक जीवन स्तर के साथ स्वच्छ और साफ-सुथरा   वातावरण प्रदान करते हैं तथा स्मार्ट समाधान लागू करने का प्रयास करते हैं। योजना की अवधि 2015-16 से 2019-20 यानी पांच वर्ष तक है। इस योजना का उद्देश्य स्मार्ट सिटी मिशन के चयनित क्षेत्र का आर्थिक विकास और बुनियादी ढाँचा प्रदान करते हुए नागरिकों के लिए बेहतर जीवन स्तर के साथ-साथ स्वच्छ वातावरण प्रदान करना है

स्मार्ट सिटी से यह होंगे फायदे
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत प्रत्येक नागरिक को किफायती घर, आधारभूत सुविधा, 24 घंटे पानी एवं विद्युत आपूर्ति, शिक्षा के पर्याप्त विकल्प, सुरक्षा की आधुनिक सुविधा, मनोरंजन और खेलकूद के साधन सहित अच्छे अस्पताल के अलावा आसपास के क्षेत्रों से हाईस्पीड कनेक्टिविटी की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है।


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