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कुशीनगर हादसा : इतना दर्दनाक कि कलेजा निकल पड़े

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Apr 26 2018 8:30PM
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13 बच्चो में तीन तो सगे भाई-बहन थे

कुशीनगर. मानवरहित रेलवे क्रासिंग पर आज सुबह जो हादसा हुआ उसने पूरे देश को दहला दिया. ट्रेन की चपेट में आने से 13 मासूमों की मौत की खबर जिसने भी सुनी वह दहल गया लेकिन दिल दहला देने वाली इस खबर के भीतर भी एक ऐसी खबर है जो रोंगटे खड़े कर देने वाली है. इस हादसे में अमरजीत प्रसाद को तो ऐसी तकलीफ दे गया जो उनकी आख़री सांस तक आज का दिन शूल की तरह से चुभता रहेगा. इस हादसे में उनके तीनों बच्चे उनका साथ छोड़कर हमेशा के लिए विदा हो गए.

 

इस हादसे में 13 बच्चो की मौत हुई है. इन तेरह बच्चो में तीन बच्चे अमरजीत प्रसाद के थे. अमरजीत प्रसाद के तीन ही बच्चे थे. बच्चों में 11 वर्षीय रवि सबसे बड़ा था. उसके बाद 9 साल का अनूप और 7 साल की रागनी सबसे छोटी थी. हादसे के बाद से घर में मातम का माहौल है.

अमरजीत मिश्रौली गांव के प्रधान हैं. तीनों बच्चे हंसते -खेलते स्कूल के लिए निकले थे, लेकिन थोड़ी देर बाद ही घर पर इस हादसे की खबर पहुँची. प्रसाद परिवार को तो जैसे सांप सूंघ गया. खबर मिलते ही वह मौके पर पहुंचे और बच्चों को जिला अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टर ने तीनों को मृत घोषित कर दिया.

विशुनपुरा थाना क्षेत्र के दुदही बहपुरवा रेलवे क्रॉसिंग पर सुबह 6-50 बजे गोरखपुर जाने वाली 55075 अप सवारी गाड़ी की चपेट में स्कूली बच्चों से भरी बस आ गई. बस के परखचे उड़ गए. घटना के बाद कोहराम मच गया. घटना तब हुई जब स्कूली बच्चों से भरी बस फाटक विहीन रेलवे क्रासिंग को पार कर रही थी और तभी ट्रेन आ गई. दुदही बाजार स्थित डिवाइन स्कूल की बस बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी. दुदही - रजवाबर समपार फाटकविहीन क्रासिंग पर जैसे ही बस चढ़ी कि गोरखपुर जाने वाली सवारी गाड़ी आ गई और बस चपेट में आ गई. वैन के ड्राइवर नियाज़ की भी बाद में मेडिकल कालेज में मौत हो गई.

सवाल यह उठता है कि कुशीनगर में अपनी जान गंवाने वाले मासूम बच्चों का गुनहगार कौन है. क्या किसी एक विभाग की जिम्मेदारी है, या फिर इससे जुड़े कई विभाग इसकी जद में आते हैं. किसकी कितनी जिम्मेदारी है यह बात जांच में भले ही सामने आ जाए लेकिन हर एक विभाग कहीं न कही जिम्मेदार तो है क्या यूं ही मासूमों को अपनी जान पर खेलना होगा या यह सभी विभाग अपनी जिम्मेदारी लेंगे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की कोशिश होगी.

कुशीनगर में आज जिस तरह का हादसा हुआ वैसे दर्दनाक हादसों को अभी कई जिलों की मानवरहित रेलवे क्रासिंग आमंत्रण दे रही हैं. अम्बेडकरनगर जिले में भी रेल विभाग और जिम्मेदार कुशीनगर जैसी घटना का इंतजार कर रहे हैं. यहाँ जिला मुख्यालय पर फ्लाईओवर के नीचे से बड़ी संख्या में लोग रेलवे क्रासिंग पर करते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इसी क्रासिंग से थोड़ी दूर पर चार विद्यालय हैं जिनमें पढ़ने वाले बच्चे इसी क्रासिंग को पार कर रोज स्कूल आते जाते हैं.  इसके अलावा लखनऊ वाराणसी और अकबरपुर टाण्डा रेल प्रखण्ड पर तीन दर्जन से अधिक मानव रहित रेलवे क्रासिंग हैं. जिससे होकर स्कूली बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग सभी गुजरते हैं. जिससे कभी भी बड़ी  घटना हो सकती है.

डीआइजी प्रवीण कुमार ने बताया कि इस मामले में स्कूल वाहन के चालक की शिथिलता सामने आयी है. वैन में संख्या से अधिक बच्चे बैठाए गये थे. घटना के बाद स्कूल के प्रबंधक को हिरासत में लिया गया है. स्कूल प्रबंधक करीम जहाँ खान की खुद की गाड़ी थी, ड्राइवर का लाइसेंस भी स्कूल वैन चलाने के लिए वैलिड नहीं था. इस मामले में धारा 304, 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. इस स्कूल वैन में अटेंडेंट भी नहीं था. मामले की जांच कमिश्नर लेवल पर चल रही है.


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