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कुदरत की मार के बाद अब मिल रही सिस्टम की मार

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: May 14 2018 6:55PM
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कुशीनगर. जिले के दुदही रेलवे स्टेशन के पास बहपुरवा रेलवे क्रासिंग पर 26 अप्रैल हुई दुर्घटना में अपने कलेजे के टुकडों को खो चुके पीड़ित कुदरत की मार के बाद अब सिस्टम की मार झेलने को मजबूर हैं. ट्रेन की चपेट में स्कूली बस के आने से मरे 13 मासूमों के परिजनों के आंसू पोछने के लिए प्रदेश सरकार व रेल प्रशासन ने 2-2 लाख रुपये के चेक तो दिए हैं लेकिन कर्मचारियों की लापरवाही व बैंक की मनमानी से पीड़ितों के खाते में धन नहीं जा पा रहा है.

हालत यह है कि रेलवे द्वारा दिए गए चेक को बैंक वाले जमा नहीं कर रहे हैं, तो तहसील प्रशासन द्वारा दिए गए कई चेक ऑब्जेक्शन लगकर वापस आ जा रहे हैं. यही नहीं चेक क्लीयर न होने के बावजूद भी क्लीयरेंस के नाम पीड़ितों के खाते से रकम अलग से कट जा रही है. लोगों ने आरटीजीएस के जरिए धनराशि खातों में अंतरित करने की मांग की है.

26 अप्रैल की सुबह गोरखपुर जा रही पैसेंजर ट्रेन की चपेट में स्कूली बस के आ जाने से 13  मासूमों की मौत हो गई थी. हादसे के शिकार तेरह मासूमों के आठ परिवारों को रेल विभाग तथा जिला प्रशासन ने दो - दो लाख के हिसाब से घटना के दिन ही चेक उपलब्ध करा दिए थे. आनन फानन में दिए गए चेकों में त्रुटियां हो गईं जिससे पीड़ितों को गलती दुरुस्त कराने के लिए कई बार तहसील का चक्कर काटना पड़ा. परन्तु बात यहीं तक सीमित नहीं रही.

अपने दो बेटों को खोने वाले  हैदर ने जब तहसीलदार द्वारा दिए गए चेक को बैंक में जमा किया तो ऑउट ऑफ रेंज की टिप्पणी के साथ वापस आ गया है. अपने तीनों बच्चो रवि, टुन्नु और रागिनी को खोने वाले मिश्रौली निवासी अमरजीत को मिले छह - छह लाख के दोनों चेक क्लीयर नहीं हो सके हैं. रेल विभाग के चेक को बैंकों ने वाराणसी भेजा है. जो दस दिन बाद भी क्लियर नहीं हुआ है. अमरजीत को तहसील प्रशासन द्वारा दिया गया चेक की धनराशि दो - दो बार खाते में पोस्ट बैंक ने वापस ले लिया है. अमरजीत को मिले चेक भी आपत्ति लग कर दो बार वापस आ चुके हैं. रुपये तो अमरजीत के खाते में पोस्ट तो नहीं हुए उल्टे बैंक ने दो बार में 472 रुपये जरूर काट लिए हैं. दो बच्चो मेराज और मुस्कान को खोने वाले मैनुद्दीन को  भी रेल विभाग से मिला चेक पेंडिंग ही है. एक एक बेटे खोने वाले जहीर और नजीर को तो आपना चेक दुरुस्त कराने वाले रेल विभाग के ऑफिस वाराणसी तक जाना पड़ा, लेकिन रुपया अभी भी खाते तक नहीं आ सका है.

अपनी दो बेटियों साजिदा और तमन्ना को खोने वाले हसन के खाते मे 8.50 लाख रुपये पोस्ट होने के बाद 4.50 लाख रुपये हसन के खाते से वापस ले लिए गए. यही नहीं रेलवे द्वारा दिए गए चेक को दुदही पीएनबी जमा नहीं कर रहा है. चेक को वाराणसी जमा करने की सलाह बैंक द्वारा दी जा रही है. इन पीड़ित परिवारों का चेक भुगतान के लिए बैंकों का चक्कर लगाना उनके दुखों पर भारी पड़ रहा है. घायलों को मिले चेक का भी यही हाल है. इन परिवारों के लोगों ने मदद की धनराशि को सीधे खातों में आरटीजीएस के जरिए भेजे जाने की मांग की है.


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