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उसने खिलौनों की तर्ज़ पर साइकिल को बना दिया स्कूटी

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Aug 3 2018 2:05PM
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गुणा नंद ध्यानी

गोरखपुर. बीटेक या एमटेक के छात्रों को नए-नए अविष्कार करते तो आपने कई बार देखा और सुना होगा लेकिन अपनी आवश्यकता को पूरा करने के लिए गोरखपुर के एक चित्रकार अजय ने खिलौनों से प्रेरणा लेकर एक अनोखी साइकिल बनायी है. देखने में तो यह साइकिल लगती है लेकिन चलती है स्कूटी की तरह. अजय की यह अनोखी साइकिल आज सभी के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है.

आवश्यकता अविष्कार की जननी है, इस कहावत को महराजगंज के मिठौरा बाजार के अजय कुमार ने चरितार्थ कर दिया है. गोरखपुर विश्वविद्यालय में चित्रकला के छात्र अजय ने तकनीकी दुनिया में दखल देते हुए एक ऐसी साइकिल तैयार की है जो है तो साइकिल लेकिन चलती है स्कूटी की तरह. यानी इसे चलाने के लिए पैडिल नहीं मारना पड़ता, बस स्कूटर की तरह एक्सीलेटर को घुमाना पड़ता है, हालांकि इस अनोखी साइकिल में पैडिल का विकल्प भी खुला हुआ है.

चित्रकला से तकनीक की ओर रुझान के सवाल पर अजय का कहना है कि धनाभाव के कारण उनके पास स्कूटर या बाइक नहीं है. घर से विश्वविद्यालय की दूरी अधिक होने के कारण आने में काफी दिक्कत होती थी. ऐसे में अजय ने साइकिल को ही स्कूटर का रूप देने की ठान ली. इसके लिए बच्चों के स्वचालित खिलौनों की तकनीक का गंभीरता से अध्ययन किया और डीसी मोटर से एक महीने के प्रयास के बाद साइकिल को बैटरी वाला स्कूटर बना दिया. इस स्वचालित साइकिल में अजय ने नौ एएच और 12 वोल्ट की दो बैटरी लगाई, जिसे एक बार चार्ज करने के बाद 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से सात से आठ किलोमीटर तक चलाया जा सकता है.

अजय ने यह साइकिल अपनी बनाई गयी पेंटिंग बेचकर तैयार की है और इसमें इसकी कुल लागत 11 हजार आई है. अजय की यह साइकिल आज पूरे विश्वविद्यालय में सबके आकर्षण का केन्द्र बन चुकी है. सभी इसकी एक राइड मारना चाहते हैं. अजय के दोस्त आदित्य का कहना है कि बाजार में इस तरह की साइकिलें काफी महंगी आती हैं और वो इतनी कम्फर्टेबल नहीं होती हैं, लेकिन अजय की साइकिल की बात ही अलग है.

अजय ने इस साईकिल में और ज्यादा एक्सपेरिमेंट करने की प्रक्रिया जारी रखी है और खास बात यह है कि इसे तकनीकी का कोई ज्ञान नहीं है, लेकिन अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अजय ने खिलौनों से प्रेरणा लेकर वह कर डाला जिसे करने के लिए लाखों रुपये खर्च करके ज्ञान लेना होता है.


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