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कुशीनगर में नहीं थम रहा इन्सेफ़ेलाइटिस का कहर

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Aug 4 2018 8:03PM
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कुशीनगर. पूर्वांचल के मासूमों को असमय ही मौत की नींद सुलाने वाली बीमारी इंसेफेलाईटिस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. सरकारी आंकड़ों के हिसाब से तो इस जानलेवा बीमारी के आंकड़ों में काफी कमी आई है, लेकिन गैर सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस बीमारी से सैकड़ों बच्चे पीड़ित हैं. इस बीमारी से मासूमों को बचाने के लिये केन्द्र और प्रदेश सरकार ने कई योजनाएं चलाईं लेकिन अधिकांश योजनाएं फाईलों में कैद होकर रह गयी हैं. जिसके कारण आज भी मासूम तिल-तिल कर मरने को मजबूर हैं.

बारिश शुरू होने के बाद इस बीमारी ने मासूम बच्चों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है. जिससे जिला अस्पताल के आईसीयू और जनरल वार्ड में बच्चों की भीड़ बढ़ गयी है. पूर्वांचल के पिछड़े जिलों में शुमार कुशीनगर में जापानी बुखार का सबसे अधिक प्रभाव होता है. दिमागी बुखार से इस जनपद में प्रति वर्ष दर्जनों बच्चों की मौत हो जाती है. जानकारी के अभाव में लोग बुखार आने पर सबसे पहले झोलाछाप डाक्टरों को दिखाते हैं और जब उनकी हालत गंभीर हो जाती है तब बच्चों को लेकर जिला अस्पताल या फिर मेडिकल कालेज का रुख करते हैं.

सरकारी आंकड़ों की बात करें तो इस साल जनवरी से लेकर अब तक 80 मरीज जिला अस्पताल में भर्ती हुए हैं जिनमें से 9 मासूम बच्चों की मौत हो चु़की है. जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती बच्चों में से कई गंभीर मरीजों को गोरखपुर मेडिकल कालेज रेफर किया जा चुका है.

प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ कभी राजनीतिक चर्चा में इस लिए आये थे क्योंकि उन्होंने कुशीनगर जिले में पाँव पसार रही मासूमों के लिए जानलेवा बीमारी जापानी बुखार के खिलाफ जंग छेड़ी थी. उन्होंने सरकार से इसकी रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की थी. योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर जनपद में जगह-जगह रोड पर उतर कर राजनीतिक लड़ाई लड़ी तो वहीं कई गाँव का दौरा कर प्रशासनिक अमले की बेचैनी बढ़ा दी थी, लेकिन अब जब वह उत्तर प्रदेश की कमान संभाले हुए हैं. तो उन्हीं के अधिकारी और कर्मचारी उनकी आँखों में धूल झोंकने के लिए सरकारी आंकड़ों में फेर-बदल कर रहे हैं. इन्सेफेलाईटिस पीड़ित मरीज को या तो रेफर कर दिया जा रहा है या उनके आंकड़ों को सरकारी रजिस्टर में दर्ज ही नहीं किया जा रहा है. उदाहरण के लिए आंकड़ों पर नजर डाली जा सकती है. जैसे कि जिला अस्पताल के सीएमएस बजरंगी पाण्डेय ने बताया कि पिछले वर्ष जून माह तक 373 मरीज अस्पताल के रिकार्ड में दर्ज किये गए थे, जिसमें 21 पोजिटिव पाए गए थे लेकिन 2018 के जून तक केवल 27 ही दिखाया जा रहा है और पोजिटिव 0 है.

वहीं लोगों की मानें तो इस पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए सरकार को अलग से इस पर सर्वे कराना चाहिए, क्योंकि अधिकतर लोग सरकारी अस्पताल न जाकर प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं. जिसके कारण सरकारी आंकड़े झूठे साबित हो रहे हैं.

पिछले 5 सालों के आंकड़ों पर एक नजर

वर्ष                                      भर्ती हुए मरीज                                 जिसकी मौत हो गई 

2014                                      826                                                      145   

2015                                      608                                                       137

2016                                      1029                                                      161

2017                                        883                                                       126

2018 (अब तक)                          92                                                          9

इन्सेफेलाईटिस के मामले में जिला अस्पताल पर कोई भी नई तकनीकी या वार्ड नहीं बढ़ाये गए हैं. केवल कागजी बयानबाजी के आधार पर इस जानलेवा बीमारी से निपटने की तैयारी स्वास्थ्य विभाग के पास है. वहीं दूसरी तरफ इस विषय को लेकर ग्रामीण क्षेत्र की बात करें तो केवल जन जागरूकता के अलावा दूसरी कोई भी सुविधा मुहैया नहीं कराया गया है. शुद्ध पेयजल के लिए जिला प्रशासन उदासीन बना हुआ है तो सम्बंधित दवाओं का छिड़काव भी नहीं कराया जा रहा है.

ग्रामीण क्षेत्र में मच्छरों के बढ़ती संख्या से लोगों का रात या दिन में जीना मुहाल हो गया है. लगभग 15 वर्षों से मच्छररोधी दवाओं का छिड़काव नहीं कराया गया है. इन्सेफेलाईटिस के मामले में कुशीनगर जनपद काफी संवेदनशील माना जाता है. कुशीनगर जिले के 641 गाँव इस भयानक बीमारी के दृष्टिकोण से अधिक प्रभावित मानते हुए चिन्हित किये गए हैं. वहीं दूसरी तरफ इस बीमारी और जनपद से पूरी तरह परिचित प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बनने के बाद कुशीनगर के प्रथम दौरे के दौरान 25 मई को कसया तहसील के मैनपुर गाँव का दौरा किया था. इस बीमारी की रोकथाम के लिए पूरे प्रदेश में टीकाकरण के अभियान की शुरुआत करने के लिए वृहद् स्तर पर कार्यक्रम किया था. जिसके बाद पूरे प्रदेश के सभी जनपदों में बारी-बारी टीकाकरण अभियान चलाया गया.

उन्होंने हर गाँव को स्वच्छ रखने, समय पर टीकाकरण करने, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने और जापानी बुखार से पीड़ित सभी मरीजों का ईलाज शुरू करने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बाद भी लापरवाह अधिकारी और कर्मचारी योगी के निर्देश को ठेंगा दिखा रहे हैं. इस बीमारी से पीड़ित रोगियों को अस्पताल में ठीक से ईलाज नहीं किया जा रहा है.

जिले में सफाई और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था पूरी तरह बदहाल हो गया है. इस सम्बन्ध में जब सीएमओ का पक्ष लेने की कोशिश की गई तो वह कभी समय नहीं, तो कभी बाद में आने की बात कहकर कैमरे के सामने आने से बचने का प्रयास कर रहे हैं.


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