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प्रदूषित होती आमी पर NGT सख्त, मुख्य सचिव के नेतृत्व में हाई पॉवर कमेटी का आदेश

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Aug 24 2018 4:52PM
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गोरखपुर. एक तरफ सरकार गंगा को निर्मल बनाने और नदियों के संरक्षण के लिए अपने संकल्प और दावे कर रही है. तो दूसरी तरफ एनजीटी सरकार के रवैये पर कड़ी टिप्पणी के साथ जुर्माना भी लगा रही है. ताजा मामला पूर्वांचल की आमी नदी से जुड़ा है.

अनियंत्रित औद्योगीकरण और जिम्मेदारों के रवैये से जहरीली बन चुकी आमी नदी को ले कर एनजीटी में सुनवाई चल रही है. ट्रिब्यूनल सरकारी रवैये को लेकर कितना क्षुब्ध है इसका अंदाजा उसकी टिप्पणियों से लगाया जा सकता है.

आमी नदी प्रदूषित हो गई है और इसका असर गंगा पर भी पड़ रहा है लेकिन सभी संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी से भाग रही हैं. प्रशासन और जिम्मेदार विभाग आदेशों का पालन भी नहीं कर रहे हैं. एनजीटी ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि वह अपने एक्शन की जानकारी जनता के लिए पोर्टल पर डालें और 3 महीने के अंदर कार्य की प्रगति रिपोर्ट भी कोर्ट को बताएं. 

एनजीटी ने यूपी के चीफ सेक्रेटरी के नेतृत्व में एक हाई पॉवर कमेटी बनाने को कहा है. साथ ही ट्रिब्यूनल में इस मामले में नगर निगम और सरकार पर पहले लगाये गए जुर्माने के आदेश को ख़ारिज करने से भी मना कर दिया है. आमी को लेकर यह याचिका स्थानीय संगठन “आमी बचाओ मंच” ने की है. संगठन के मुखिया विश्वविजय सिंह ने इस फैसले के बाद कहा कि आमी एक छोटी नदी है, लेकिन महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि इसी के किनारे बुद्ध भी रहे और कबीर भी. उन्होंने बताया कि रिपोर्ट बताती है कि अब आमी का पानी इतना प्रदूषित है कि मछली भी जिन्दा नहीं रह पाए. आमी प्रदेश की छोटी नदियों में बढ़ते प्रदूषण की मिसाल भी है.


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