आप यहां हैं : होम» राज्य

हाईकोर्ट ने कहा, अपने अधिकारियों को संभालिये, यह सरकार को ले डूबेंगे

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Sep 9 2018 5:46PM
NAINITAL HIGHCOURT_201899174623.jpg

पंकज राणा

देहरादून. विधायकों और नेताओं के बाद सूबे के अधिकारियों के बारे में अब कोर्ट ने भी सरकार को आगाह किया है. कोर्ट ने सरकार से सख्त लहजे में कहा है कि अपने अधिकारियों को संभालिए. नहीं तो ये अधिकारी आप की सरकार को ले डूबेंगे. दरअसल दो दिन पहले कोर्ट ने कॉर्बेट नेशनल पार्क में बाघों की मौत पर फैसला सुनाया था, और सरकार को आगाह किया था कि सरकार तेजी से घट रहे बाघों की संख्याओं और उनकी मौतों की सीबीआई जांच करवाएं. साथ-साथ कोर्ट ने यह भी कहा था कि राज्य के अधिकारियों पर भी सरकार लगाम लगाए. कोर्ट ने कहा था कि कुमाऊं में जितने भी वन अधिकारी तैनात हैं उनकी संपत्तियों की जांच करवाए और सुनिश्चित करे कि जांच में क्या पाया गया है. इस मामले पर जब सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत से सवाल किया गया तो सीएम को इस बारे में जानकारी ही नहीं थी. सीएम पास बैठे अधिकारी ने उन्हें पूरी बात बताई.

अब तक विधायक ही सरकार की नौकरशाही से परेशान थे. राज्य के तमाम विधायकों ने प्रेमचंद अग्रवाल और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से कई बार जिले के अधिकारियों के साथ-साथ सचिवालय में बैठे अधिकारियों की शिकायत की है. शिकायत यह है कि कोई अधिकारी काम करने के लिए तैयार नहीं है. इतना ही नहीं अधिकारी नेताओं के फोन तक नहीं उठाते. विधायकों नेताओं के बाद अब कोर्ट ने भी सरकार को आगाह किया है और सचेत किया है कि अपने अधिकारियों को संभालिए नहीं तो यह अधिकारी आप की सरकार ले डूबेंगे.

दरअसल दो दिन पहले कोर्ट ने सख्त लहजे में कॉर्बेट नेशनल पार्क में बाघों की मौत को लेकर एक फैसला सुनाया था और सरकार को आगाह किया था कि सरकार तेजी से घट रहे बाघों की संख्याओं को लेकर और उनकी मौत को लेकर सीबीआई जांच करवाए. साथ-साथ कोर्ट ने यह भी कहा था कि राज्य के अधिकारियों पर भी सरकार लगाम लगाए. कोर्ट ने तो यह तक कह दिया था कि अगर सरकार इन अधिकारियों को नहीं संभालेगी तो एक दिन यही अधिकारी सरकार को ले डूबेंगे.

कोर्ट में सरकार को फटकार लगाते हुए यह सब बात कही थी लेकिन ऐसा लगता है कि कोर्ट के आदेशों को शायद उनके नौकरशाह मुख्यमंत्री तक नहीं पहुंचाते और शायद यही कारण है कि जब पत्रकारों ने उनसे इस बाबत सवाल किया तो मुख्यमंत्री को इस बात की जानकारी ही नहीं थी. मुख्यमंत्री पास बैठे अधिकारी से ही पूछ रहे थे कि क्या कोर्ट ने कुछ ऐसा फैसला सुनाया है तब जाकर पास में बैठे अधिकारी ने उन्हें यह पूरी बात बताई.

उत्तराखंड में नौकरशाह इतने बेलगाम हो गए हैं कि उनकी शिकायतें लगातार न केवल सरकार के पास पहुंच रही है बल्कि कोर्ट के पास भी अलग-अलग माध्यम से अधिकारियों की शिकायत पहुंचती हैं. इसके बाद ही नैनीताल हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया था.

सीएम ने कहा कि यह कोई नया मामला नहीं है पूर्व की सरकारों में भी इसी तरह के मामले और शिकायत अधिकारियों और नौकरशाहों के खिलाफ आती रही है. लगता है कि राज्य में सरकार के दबाव में या सरकार के आदेशों को अधिकारियों मानने के लिए तैयार ही नहीं है क्योंकि राज्य में भी अधिकारी अपने अपने ग्रुप बना चुके है.


देश-दुनिया की अन्य खबरों और लगातार अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें। आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं।