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आज हिमालय दिवस है

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Sep 9 2018 9:45PM
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श्रीनगर (गढ़वाल). आज हिमालय दिवस है. इस अवसर पर सरकार हिमालय को बचाने के लिए तमाम तरह के कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है, लेकिन हिमालय की पारिस्थितिकी, पर्यावरण, जल-जंगल-जमीन- हिमालयी सभ्यताओं तथा संस्कृतियों को लेकर पयार्यवरणविद् जगत सिंह जंगली ने चिंता जताई है.

उत्तराखण्ड सहित अन्य हिमालयी राज्यों की सरकारें भले ही पूरे साल जल-जंगल-ज़मीन को बचाने के लिए कार्यक्रम आयोजित करती हों लेकिन धरातल पर कुछ भी बदलाव नही है. हिमालय का पारिस्थतिकी तंत्र खतरे में है. ग्लेश्यिर पिघल रहे हैं, जंगल धू-धू कर जल रहे हैं. ऐसे में कार्यक्रमों या सेमिनार का आयोजन कर हिमालय को नहीं बचाया जा सकता. प्रसिद्ध प्रयार्यवरणविद् और उत्तराखण्ड वन विभाग के ब्रांड अम्बेसडर जगत सिंह जंगली ने इस पर चिंता जताई है.

उनका कहना है कि हिमालय को बचाने के लिए सरकारी और गैर सरकारी तौर पर काफी प्रयास चल रहे हैं, लेकिन अगर वाकई हिमालय को बचाना है तो पहले यहॉ के जल,जंगल जमीन को बचाना जरूरी है. तभी हिमालय का पारिस्थतिकी तंत्र व्यवस्थित रूप से चल पायेगा.

हिमालय के जंगल तेजी से जल रहे हैं, हर साल गर्मियां शुरू होते ही सरकार फायर सीजन घोषित कर देती है. प्रत्येक साल लाखों हेक्टेयर जंगल जल कर खाक हो जाते हैं. ऐसे में हिमालय पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. जिससे मौसम चक्र में भी बदलाव देखने को मिल रहा है, इस पर जंगली ने कहा कि जंगल की आग को निंयत्रित तभी कर सकते हैं. जब स्थानीय लोगों की भागीदारी हो. इससे हिमालय से हो रहे पलायन पर भी रोक लगेगी और जंगल भी सुरक्षित रहेंगे.

साल में एक दिन हिमालय दिवस मनाने से कुछ नहीं होगा. हिमालय के संरक्षण के लिये तो हर दिन हिमालय दिवस मनाना होगा. हिमालय के पर्वतों, हिमनदों, नदियों, जलागम क्षेत्रों और वनों के संरक्षण के लिए पहल करने की भी आवश्यकता है.


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