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क्या इस कदर कंगाल हो गयी है कांग्रेस !

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Sep 19 2018 5:51PM
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उत्कर्ष सिन्हा

आजादी के आन्दोलन में करो या मरो का जो नारा कांग्रेस ने लगाया था. वही नारा पार्टी एक बार फिर लगा रही है, लेकिन इस बार वजह दूसरी है.

देश की सबसे बड़ी पार्टी कहलाने वाली कांग्रेस फिलहाल पैसे के संकट से जूझ रही है. एक तरफ तो उसके सामने पैसे से भरपूर बीजेपी के खिलाफ बड़े अभियान की चुनौती है. तो दूसरी तरफ इस अभियान के लिए पैसा जुटाने की चुनौती भी उसके सामने है. कांग्रेस अब चंदा जुटाने के लिए सड़कों पर उतरने की तैयारी में है.
 

फंड क्राईसिस से निजात पाने के लिए कांग्रेस 2 अक्टूबर से क्राउड फंडिंग का एक देशव्यापी अभियान शुरू करने जा रही है. इस लोक संपर्क मूवमेंट के दौरान कांग्रेस के सांसद और विधायक भी अपनी एक महीने की तनख्वाह पार्टी को देंगे. ऐसा पहली बार हो रहा है कि कांग्रेस फंड इकट्ठा करने के लिये सड़कों पर उतर रही है. लक्ष्य है 45 दिनों में 500 करोड़ जुटाना.

लम्बे समय तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस के बदहाली कि वजह समझने की कोशिश करते हैं तो यह वजहें सामने आती हैं. 

कांग्रेस की बदहाली की सबसे बड़ी वजह लोकसभा चुनावों में करारी हार है. इस हार के बाद कार्पोरेट चंदे और सदस्यता में कमी आ गई. 

प्रशासनिक कामों में खर्च ज्यादा होने लगा और पार्टी औद्योगिक राज्यों में सत्ता से बाहर हो गई. 

जब जेब खाली हुई तो कांग्रेस आलाकमान ने कुछ कदम भी उठाये. पार्टी पर तमाम बंदिशें भी लगाई गईं. पैसा बचाने की कवायद पार्टी दफ्तर से शुरू की गई. पार्टी दफ्तर के खर्च में कटौती की गई. कई कार्यालय बंद कर दिये गए. पदाधिकारियों से गाड़ी वापस ले ली गई. बड़े पदाधिकारियों के ईंधन भत्ते पर रोक लगा दी गई. पदाधिकारियों को हवाई यात्रा के बजाए ट्रेन यात्रा का निर्देश जारी किया गया.

कांग्रेस जैसे-जैसे सत्ता से बाहर होती गयी वैसे-वैसे उसके चंदे में भी कमी आती गयी. एडीआर की रिपोर्ट बताती है कि 2016-17 में कांग्रेस की कमाई में 14 फ़ीसदी की कमी आई और उसे 225.36 करोड़ रुपये का चंदा मिला. जबकि इसी दौरान बीजेपी को 1034 करोड़ रुपये मिले और उसकी ग्रोथ 81 फ़ीसदी बढ़ गयी.

कांग्रेस इस वक्त अपने वजूद की लडाई लड़ने में लगी है. उसका मुकाबला उस बीजेपी से है जिसकी न सिर्फ जेब भारी है. बल्कि एक के बाद एक बड़े अभियानों के जरिये चुनाव को मंहगा करने में भी नहीं चूक रही है.

पार्टी के लिए पैसा जुटाने के लिए कांग्रेस ने क्राउड फंडिंग का फैसला किया है. इस अभियान को एक और नजरिये से भी देखने की जरूरत है. कांग्रेस इस अभियान के जरिये पैसा तो जुटाएगी ही. साथ ही जनसंपर्क को बढ़ाने के जरिये खुद के प्रति सिम्पैथी भी जुटाने की कोशिश करेगी. कभी चवन्नी के जरिये कांग्रेस ने देश भर में खुद को मजबूत किया था. एक बार फिर कांग्रेस उसी राह पर है.

(लेखक नेशनल वाइस में एसोसियेट एडीटर हैं)


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