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ये दीवाली राममंदिर वाली?

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Sep 28 2018 2:37PM
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राजेंद्र कुमार

सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने मस्जिद में नमाज इस्लाम में अनिवार्य नहीं बताने वाले अपने पूर्व के फैसले को बरकरार रखते हुए इसे बड़ी बेंच में भेजने से इनकार कर दिया है. शीर्ष अदालत के इस फैसले को दूरगामी महत्व का माना जा रहा है. कोर्ट के इस फैसले को मुस्लिम पक्षकारों के लिए झटका भी माना जा रहा है. कहा जा रहा है कि इस फैसले के बाद अयोध्या विवाद की सुनवाई से रोड़ा हट गया है. इस बीच शीर्ष अदालत के इस फैसले पर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है.

बीजेपी ने इस फैसले का स्वागत किया है, तो एआईएमपीएलबी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने जो समझा वही किया है. यानि इस संगठन को सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश रास नहीं आया. जाहिर है अयोध्या प्रकरण पर लगातार राजनीति करने वाले संगठन इस मामले में आगे भी अपना विरोध जारी रखेंगे. क्योंकि जिस तरह से बीजेपी और उससे जुड़े संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है, उनके रुख से साफ है कि अब वह अयोध्या में रामजन्मभूमि स्थल पर भव्य राम मंदिर के निर्माण का मसला जोर शोर से उठाएंगे, और आगामी दीपाली पर उनका यह उत्साह अयोध्या में दिखायी देगा, क्योंकि योगी सरकार ने दीपाली के दिन अयोध्या में मंदिर और घाटों को दीपों से सजाने का फैसला किया है.

वैसे भी बीते पैंतीस सालों से देश के किसी राज्य में कोई भी चुनाव रहा हो, बीजेपी अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण का मुद्दा उठाती रही है. ऐसे में अब जब सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद में नमाज इस्लाम में अनिवार्य नहीं बताने वाले अपने पूर्व के फैसले को बरकरार रखते हुए इसे बड़ी बेंच में भेजने से इनकार कर दिया है तो बीजेपी सहित उससे जुड़े संगठन इस फैसले का लाभ जरूर उठाएंगे, और बीजेपी इस मुद्दे को जोर शोर से जनता के बीच उठाएगी, क्योंकि अगले साल देश में आम चुनाव होने हैं.

इस दौरान बीजेपी तथा उससे जुड़े संगठन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को जोरशोर से प्रचारित करेंगे. वैसे भी बीजेपी मंदिर मामले को लगातार उठाती रही है. कुछ दिनों पूर्व ही यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने राममंदिर के मुद्दे को छेड़ा था. ताकि जनता में यह संदेश दिया जा सके कि अयोध्या में राममंदिर निर्माण का मसला बीजेपी के एजेंडे में है और राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण ही केन्द्र की हिंदूवादी नरेन्द्र मोदी सरकार इस मामले में विधेयक नहीं ला पा रही है. इसलिए देश की जनता बीजेपी की दिक्कतों को समझे और आगामी चुनावों में एक बार फिर मोदी सरकार को केन्द्र की सत्ता में लाए. ताकि राज्यसभा में भी मोदी सरकार का बहुमत हो सके और फिर केन्द्र सरकार सोमनाथ की तर्ज पर अयोध्या में भी भव्य राममंदिर निर्माण का रास्ता तैयार कर सके.

केशव प्रसाद के अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तो लगातार अयोध्या मसले को चर्चा में रखा है. वह खुद कई बार अयोध्या गए हैं. राम जन्मभूमि मंदिर का दर्शन किया और अयोध्या को दीपावली में दीपों से सजवाया. यही नहीं उन्होंने सबकी सहमति से राममंदिर के निर्माण का रास्ता तलाशने का प्रयास करने वाले श्रीश्री रविशंकर के प्रयासों को भी सराहा और राममंदिर निर्माण के लिए शिया वक्फ बोर्ड की जमीन देने का ऐलान करने वाले वसीम रिजवी को वाई श्रेणी की सुरक्षा तक प्रदान की, और अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण न कराने को लेकर नाराज हो रहे साधू संतों को भी मुख्यमंत्री ने मनाने का प्रयास किया. ताकि बीजेपी के गले की हड्डी बनता जा रहा अयोध्या का मामला सुलझाया जा सके.

अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद जहां सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई में तेजी आयेगी, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी और उससे जुड़े संगठन जनता के बीच यह प्रचारित करेंगे कि सुप्रीम कोर्ट ने यह कह दिया है कि मस्जिद में नमाज अदा करना इस्लाम का अंतरिम हिस्सा नहीं है, इसलिए मुस्लिम समाज अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए पहल करे, और इस मामले में कट्टरपंथी मुस्लिम धर्मगुरूओं को मनाए, ताकि हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय मिलकर त्योहारों का आनंद लें. साथ मिलकर दीपाली मनाए, ईद मनाएं. देश में ऐसा माहौल बनाने के बीच ही यह भी संभव है कि विहिप तथा बीजेपी से जुड़े संगठन यह मांग करें कि केन्द्र सरकार अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए पहल करे और सोमनाथ की तर्ज पर अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण कराने का प्रयास करे.

(लेखक नेशनल वाइस में एसोसियेट एडीटर हैं.)


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