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डेढ़ साल बाद भी रिंग रोड की प्रगति घोषणा पर ही टिकी है

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Sep 28 2018 4:38PM
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नैनीताल. डेढ़ साल पहले सीएम ने 51 किलोमीटर लम्बी रिंग रोड बनाने की घोषणा की थी. डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी रिंग रोड की फाइल शासन में ही दबी हुई है. पूरी योजना की लागत राशि लगभग 700 करोड़ की है. जबकि लोक निर्माण विभाग ने प्रथम चरण के कार्य के लिए 208 करोड़ की डीपीआर शासन को भेजी है. बावजूद इसके अब तक रिंग रोड का कार्य शुरु नहीं हो सका है.

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पर्यटकों को जाम से निजात दिलाने के लिए रिंग रोड बनाने की घोषणा की थी. यह रिंग रोड काठगोदाम, लामाचौड़, पनियाली से होते हल्द्वानी शहर को जोड़ेगी, लेकिन डेढ़ साल बाद भी रिंग रोड पर काम शुरू नहीं हो सका है. वहीं लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता रणजीत रावत का कहना है कि पहले चरण के लिए भूमि अधिग्रहण और वन भूमि के हस्तांतरण की फाइलें लंबित हैं. प्रशासन की ओर से स्वीकृति मिलने पर काम शुरू कर दिया जाएगा.

नैनीताल जिले के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की पहली घोषणा, डेढ़ साल बाद भी ठंडे बस्ते में पड़ी है. त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार जिले के आगमन पर 51 किलोमीटर लम्बी रिंग रोड बनाने की घोषणा की थी, लेकिन सीएम के डेढ़ साल का कार्यकाल बीत जाने के बाद भी रिंग रोड की फाइल शासन में ही दबी हुई है. जबकि लोक निर्माण विभाग द्वारा 700 करोड़ से अधिक की इस योजना में प्रथम चरण के कार्य के लिए 208 करोड़ की डीपीआर बनाकर शासन में भेजे जाने के बावजूद राज्य सरकार ने इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है.

30 दिसम्बर 2017 को लोक निर्माण विभाग के हल्द्वानी खंड द्वारा शासन को प्रथम चरण के कार्य की स्वीकृति के लिए भेजी गई फाइल एक साल बाद भी ठंडे बस्ते में ही पड़ी हुई है. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पर्यटन की दृष्टि से पहाड़ों को जाने वाले पर्यटकों को यातायात के भारी दबाव से निजात दिलाने और सुविधाजनक यात्रा के लिए रिंग रोड की घोषणा की थी.

यह रिंग रोड काठगोदाम, लामाचौड़, पनियाली, मोटाहल्दू और गौलापार होते हुए हल्द्वानी शहर को चारों और से जोड़ेगी, लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणा होने के बावजूद रिंग रोड के लिए हो रही देरी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करने को मजबूर कर रही है. हालांकि लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता रणजीत रावत का कहना है कि पहले चरण के कार्य में भूमि अधिग्रहण और वन भूमि के हस्तांतरण जैसे मामले निस्तारित होने हैं. जिसके लिए फाइल शासन में भेज दी गई है. जैसे ही वहां से स्वीकृति मिलेगी इसका काम शुरू कर दिया जाएगा.


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