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काशी में अंतिम संस्कार पर भी महंगाई की मार

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Oct 5 2018 12:04PM
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वाराणसी. काशी में मरने से मोक्ष मिलता है, लेकिन मान्यता है कि जिनकी मृत्यु काशी में नहीं होती है, उनको महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर सिर्फ मुखाग्नि मिलने से ही शिवलोक की प्राप्ति हो जाती है. अब इस महंगाई के दौर में बनारस के इस महाश्मशान पर मोक्ष के लिए आने वाली लाशों को भी महंगाई से गुजरना पड़ रहा है.

काशी में एक पुरानी परंपरा का निर्वहन सदियों से होता रहा है. परंपरा है डोम राज परिवार से मृत्यु के बाद मुखाग्नि के लिए आग लेने की, आग लेने की इस परंपरा के बदले में पहले तो लोग स्वेच्छा से दान देते थे, लेकिन समय बदलने के साथ आग लेने की दर निर्धारित कर दी गई. पहले यह नगर निगम की तरफ से निर्धारित हुआ और 151 रुपये देकर आग ली जाने लगी, लेकिन इसके बाद जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती गई वैसे वैसे इस दर में भी इजाफा होता गया.

वर्ष  2012, 2014, 2018 हर साल 2 साल में इस दर में इजाफा हुआ. 151 रुपये के बाद 251 रुपये 251 के बाद 301 रुपये और 301 के बाद 351 और अब यानी 2018 में तेजी से बढ़ रही महंगाई की वजह से मोक्ष के लिए इस शमशान घाट पर डोमराज परिवार की तरफ से दी जाने वाली आग के बदले 501 रुपये की दर निर्धारित की गई है.

इतना ही नहीं घाट पर चिता लगाने के बदले जो रेट 251 रुपये था वह भी बढ़कर 301 रुपये हो गया है. यानी मरने के बाद भी महंगाई की मार अब जिंदा नहीं बल्कि मुर्दों को झेलनी पड़ रही है. इस रेट के बढ़ने के बाद पूरे महा श्मशान मणिकर्णिका पर डोम राज परिवार की तरफ से बकायदा पोस्टर लगाकर यहां आने वाले सब यात्रियों को बढ़ाए गए रेट की जानकारी दी जा रही है, लेकिन लोगों को भारी परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है. इसकी बड़ी वजह यह है कि इस मणिकर्णिका घाट पर सिर्फ बनारस ही नहीं बल्कि आसपास के कई राज्यों से भी लोग अपनों का दाह संस्कार करने आते हैं.

दूर दराज से आने वाले लोगों को इसलिए भी परेशानी हो रही है कि वह निर्धारित रुपए लेकर ही यहां आते हैं. जबकि लोकल लोगों के लिए परेशानी कम है. यहां आने वाले लोगों का कहना है के बगैर किसी जानकारी के अचानक से रेट बढ़ा देना ठीक नहीं है. इसकी जानकारी दी जाती तो ज्यादा बेहतर होता क्योंकि सभी लोग पैसे वाले नहीं होते. ऐसे में अंतिम संस्कार में पैसे कम भी पड़ जाते हैं.

वहीं इस फैसले के बारे में डोम राज परिवार के बहादुर चौधरी का कहना है कि कोई जोर जबरदस्ती की बात तो नहीं है, जो गरीब होते हैं. जिनके पास पैसे नहीं होते हैं उनका दाह संस्कार ऐसे ही कर दिया जाता है, लेकिन यही परंपरा है. जिसका निर्वहन सदियों से होता रहा है. महंगाई बढ़ रही है तो इसलिए इसका रेट भी बढ़ना जायज है. बीते कुछ महीने पहले ही गया रेट बढ़ाया गया और रेट भी कोई बहुत ज्यादा नहीं नॉमिनल बढ़ा है. जिसकी वजह से किसी को परेशानी तो नहीं हो रही है.

शवयात्रा में शामिल होने आये लोगो का कहना है कि यहाँ बाहर से आये लोगों को दिक्कत होती है. यहां पर नोटिस लगाया गया है,  मुखग्नि के लिए आग का रेट बढ़ाया गया है.


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