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किसानों की जमीन को खा रही है फैक्ट्री की राख

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Oct 11 2018 1:26PM
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सोनभद्र. जिले के ओबरा क्षेत्र में स्थित ओबरा पावर प्लांट की राख- बाँध के सीपेज और पावर प्लांट के द्वारा कोयले की राख को सीधे रेणु नदी में बहाने से ग्रामीण परेशान हैं. ओबरा क्षेत्र के चकाडी गांव में बने राख-बाँध के आसपास की सैकड़ों बीघा जमीन बंजर हो चुकी है और अब जमीन में कोई फसल नहीं होती है. ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना द्वारा पवार प्लांट की राख को सीधे नदी में बहा देने से पानी प्रदूषित हो रहा है, नदी के आसपास की जमीन दलदली हो रही है. जिसमें फंसकर आये दिन पशु अपनी जान भी गँवा रहे हैं. इन सब समस्याओं को लेकर कई बार जिला प्रशासन से गुहार लगाई गयी लेकिन जिला प्रशासन कोई भी कार्रवाई नहीं की.

सोनभद्र के ओबरा क्षेत्र में लगभग एक हजार मेगावाट की ओबरा बिजली परियोजना द्वारा पावर प्लांट में जलने वाली राख का ठीक से निस्तारण नहीं किया जा रहा है. राख बाँध के सीपेज के कारण आसपास की सैकड़ों बीघा जमीन बंजर हो चुकी है. किसानों का कहना है कि यहाँ अब कोई फसल नहीं होती है. आसपास के पेड़ पौधे तक सूख गए हैं. परियोजना और जिला प्रशासन से कई बार कार्रवाई और मुआवजा देने के लिए गुहार लगाई लेकिन आज तक कोई कुछ नहीं हुआ.

वहीं ग्रामीणों का यह भी कहना है कि बिजली परियोजना द्वारा राख-बाँध जरूर बनाया गया है लेकिन राख-बाँध पूरी तरह से भर जाने के कारण राख अब सीधे रेणु नदी में बहा दी जा रही है. जिससे नदी प्रदूषित हो रही है. नदी का पानी पीने से पशुओं की मौत हो जाती है और राख के कारण दलदल होने के कारण इस दलदल में फंस कर भी पशुओं की मौत हो जाती है.

ओबरा परियोजना की राख पाइपों की मरम्मत करने वाले असिस्टेंट इंजीनियर का कहना है कि ऐश-डैम में ही राख भेजी जाती है, अगर राख के बाहर जाने का कोई मामला है, तो परियोजना प्रशासन अपने स्तर से जरूर देख रहा होगा. हालाँकि प्रदेश सरकार और एनजीटी ने बिजली परियोजनाओं में राख के डिस्पोजल के सख्त मानक तय किये हैं लेकिन जमीनी स्तर पर इन मानकों का पालन नहीं किया जाता है. लेकिन परियोजना की इस मनमानी पर परियोजना प्रशासन और जिला प्रशासन का कोई भी अधिकारी कैमरे पर बोलने के लिए तैयार नहीं हुआ.


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