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नवरात्र का चौथा दिन माँ कुष्मांडा के नाम

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Oct 12 2018 4:58PM
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वाराणसी. नवरात्रि में देवी दर्शन के क्रम में आज चौथे दिन आपको ले चलते हैं माँ कुष्मांडा देवी के दर्शन के लिए. शहर में माँ का मंदिर दुर्गाकुंड इलाके में स्थित है. चौथे दिन देवी स्वरूप माँ कुष्मांडा के स्वरूप की विधिवत पूजा की जाती है.

सुबह भोर में माँ की मंगला आरती के बाद भक्तों को कुष्मांडा के दर्शन और माँ की एक झलक पाकर भक्त निहाल हो उठे. घंटा घड़ियाल से गगन मंडल गुंजायमान हो गया. नवरात्रों में चौथे दिन कुष्माण्डा देवी के स्वरूप की ही उपासना की जाती है. मां कुष्माण्डा की उपासना से आयु, यश, बल, और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है.

अपनी मंद हंसी द्वारा अण्ड अर्थात ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कुष्माण्डा देवी के नाम से अभिहित किया गया है. जब सृष्टि का त्व नहीं था. चारों ओर अंधकार ही अंधकार परिव्याप्त था. तब इन्हीं देवी ने ब्रह्माण्ड की रचना की थी.

मान्यता है कि जब माँ ने असुरों के घोर अत्याचार से देव, नर, मुनि, त्रस्त हो उठे. तब भी देवी जन संताप नाशन हेतु कुष्मांडा स्वरूप में अवतरित हुईं. माँ भगवती का यह स्वरूप त्रिविध ताप्युक्त ससार को मुक्ति प्रदान कर भक्तों को दुखों से छुटकारा दिलाता है. ताप्युक्त संसार जिनके उदर में स्थित है, वह भगवती कुष्मांडा के नाम से विख्यात हुईं. देवी के इस स्वरूप के पूजन में अर्द्ध मात्रा स्तिथा नित्या यानिचार्या विशेषत त्वमेव संध्या सावित्री त्वं देवी जननिपरा मन्त्र का विशेष महत्व है.

माँ कुष्मांडा देवी की अराधना करने वाले भक्तों पर देवी प्रसन्न होकर समस्त संतापों से मुक्ति दिलाती है. दर्शनार्थियों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन की तरफ से सभी मन्दिरों के आस-पास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये.


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