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सरकारी भूमि पर कब्जा करने वाले नही लड़ पाएंगे चुनाव

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Oct 18 2018 5:00PM
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सुनील सोनकर

मसूरी. उत्तराखण्ड में नगर निकाय के चुनाव 18 नवम्बर को होने हैं. जिसके लिये स्थानीय नेताओं द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में जोर आजमाइश शुरू कर दी है. वहीं चुनाव मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों द्वारा नामकंन पत्र भरने के लिये सभी संबधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण लेना जरूरी है. सरकारी भूमि पर कब्जा किये गए लोगों के लिये इस बार चुनाव में प्रतिभाग करना मुश्किल होगा क्योंकि कई लोगों द्वारा शासनादेश संख्या 455 विधायी एवं संसदीय कार्य 2002 (21 दिसंबर 2002) अधिनियम की उपधारा 13 (ढ) का हवाला देते हुए शिकायत की गई है कि शासनादेश के अुनसार अनाधिकृत रूप से सरकारी भूमि पर कब्जा करने वाले चुनाव में प्रतिभाग नहीं कर सकते हैं.

पूर्व में नगर पालिका परिषद द्वारा करीब 64 ऐसे लोगों के नाम तथ्यों के अुनसार उजागर किये हैं. जिन्होंने प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से सरकारी भूमि पर कब्जा किये हुए हैं. स्थानीय नेता केदार सिंह चौहान और पूरण सिंह रौछेला ने मसूरी निवार्चन अधिकारी व जिलाधिकारी देहरादून को पत्र लिख कर मांग की है कि ऐसे लोग जिनके द्वारा सरकारी भूमि पर कब्जा किया हुआ है. उनको किसी भी हाल में अनापत्ति प्रमाण पत्र न दिया जाये और अगर ऐसा कोई भी मामला उनके सामने आयेगा तो वह इसकी शिकायत मुख्य निर्वाचन आयोग उत्तराखण्ड से कर पूरे मामले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे.

एसडीएम मसूरी मीनाक्षी पटवाल और नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी एम.एल.शाह ने कहा कि नगर निकाय चुनाव को लेकर पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है. नियमानुसार की चुनाव की प्रक्रिया को अमल में लाया जा रहा है. ऐसे में अगर किसी के द्वारा कोई भी फर्जी दस्तावेज देकर अनापत्ति प्रमाण पत्र हासिल किया जाता है तो कागजात की जांच के दौरान सब सामने आ जायेगा, और ऐसा करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जायेगी.


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