आप यहां हैं : होम» धर्म-कर्म

गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक है यह भरत मिलाप

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Oct 21 2018 11:33AM
bharat milap_20181021113348.jpg

मऊ. जिले के शाही कटरा के मैदान में होन वाले भरत मिलाप की शुरुआत मुगल शासिका जहाँआरा के शासन काल से हुई थी. साढ़े चार सौ सालों से एक जैसे रूप में ही मनाया जाता रहा है. शाही कटरा के मैदान में सम्पन्न होने वाले इस ऐतिहासिक भरत मिलाप को देखने के लिए हजारों की तादाद में लोग शामिल होते हैं. इस भरत मिलाप की सबसे बडी खासियत यह है कि एक तरफ जहाँ शाही मस्जिद में मुसलमान नमाज अदा करता है और अजान के समय अल्लाह हो अकबर कहता है, ठीक उसी समय हर- हर महादेव का नारा गूंजता है. कहते हैं कि राम और रहीम की आवाजें एक साथ मिलकर सुर संगम बन जाता है. जहाँ भरत मिलाप होता है तो वहीं दूसरी तरफ राम रहीम के स्वरों का अद्भुत संगम भी होता है, जिसमें मिले सुर मेरा तुम्हारा की बात भी चरितार्थ होती है.

इस नयनाभिराम झांकी को देखकर हिन्दू मुस्लिम एकता और सौहार्द पूर्ण गंगा तहजीब की अनोखी मिसाल को देश के समाने पेश करता है. कहते हैं कि इसके पीछे की सोच मुगल शासिका जहाँआरा की थी. जो इस तरीके से भरत मिलाप करा कर दोनों सम्प्रदायों की कला और संस्कृति के अद्भुत संयोग को जन्म देता है.

सैकड़ों वर्ष बीत जाने के बाद भी यहाँ पर सम्पन्न होने वाले भरत मिलाप में कोई फेरबदल नहीं किया गया है. कालान्तर में इस भरत मिलाप स्थल ने कई हिन्दू मुस्लिम दंगों को भी जन्म दिया जिससे यहाँ पर दोनों समुदायों में आक्रोश की भावना आयी. देश के संवेदनशील शहरों की सूची में भी मऊ का नाम पहले स्थान पर पहुँच गया. इतना सब कुछ होने के बाद भी शाही कटरा के मैदान में होने वाले इस भरत मिलाप में कहीं कोई परिवर्तन नहीं किया गया. इसे देखने के बाद हर किसी की जुबान ने कहा कि ऐसा दृश्य दुनिया के लिए बेमिसाल है.

भरत मिलाप कमेटी के महामंत्री ने बताया कि यह भरत मिलाप ऐतिहासिक भरत मिलाप है. यहाँ पर अल्लाह हो अकबर और हर -हर महादेव के स्वर मिलकर मिले सुर मेरा तुम्हारा की तर्ज पर राम  रहीम के मिलन होने के बाद ही भरत मिलाप की प्रक्रिया सम्पन्न कराई जाती है.

बताया जाता है कि शाही मस्जिद कटरा के मैदान में स्वयं जहाँआरा बेगम बैठ कर इस नयनाभिराम झांकी का लुत्फ उठातीं थीं और भरत मिलाप को देखती थीं. साथ ही सराहना भी करती थीं. उन्होंने ही इस अनोखी परम्परा की शुरुआत को जन्म दिया था.

भरत मिलाप के समय में मऊ में हुए दंगे के बाद से इस भरत मिलाप को सम्पन्न कराने के लिए सुरक्षा बालों की पूरी फ़ौज लगायी जाती है. साथ ही कहीं कोई अप्रिय घटना न हो इसके लिए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक स्वंय मौके पर मौजूद रहते हैं, और भरत मिलाप को सम्पन्न कराने का जिम्मा खुद उठाते हैं. पुलिस ने इस पारंपरिक भरत मिलाप को कड़ी सुरक्षा के बीच शान्ति पूर्वक सपन्न कराया है.

गौरतलब है कि हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल और गंगा जमुनी तहजीब का अनोखा संगम यहाँ पर दिखाई देता है. जो शायद ही देश के किसी और कोने में होता हो. राम चन्द्र जी का विमान शाही मस्जिद को स्पर्श करने के बाद ही आगे बढ़ता है, और इसके बाद वह भरत से मिलते हैं.


देश-दुनिया की अन्य खबरों और लगातार अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें। आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं।