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बंद होने को है नेहरू की शुरू की हुई चीनी मिल

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Dec 10 2018 3:01PM
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शुभम गंभीर

काशीपुर. 1500 परिवारों की रोजी रोटी चलाने वाली बाजपुर चीनी मिल अब बंदी की आखिरी साँसें गिनती नजर आ रही है. सहकारिता क्षेत्र की सर्वप्रथम चीनी मिल अब बर्बादी की कगार पर पहुंच चुकी है. जिसकी ओर प्रदेश सरकार का जरा भी ध्यान नहीं है. इस चीनी मिल के बंद होने पर 1500 कर्मचारियों के रोजगार पर तलवार लटकी हुई है. बाजपुर चीनी मिल का समायोजित संचित घाटा 366.67 करोड़ रुपए हो गया है.

जनपद उधम सिंह नगर की बाजपुर विधानसभा में स्थापित चीनी मिल का अस्तित्व अब खतरे में आ गया है. बता दें कि बाजपुर चीनी मिल फैक्ट्री कि नींव भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी. बाजपुर चीनी मिल के शुरू होने से हजारों लोगों को यहां रोजगार मिला था, लेकिन आज बाजपुर चीनी मिल का अस्तित्व खतरे में दिखाई दे रहा है.

बाजपुर चीनी मिल द्वारा 148 करोड़ रुपए का सालाना कारोबार देने के बावजूद 49 करोड़ का घाटा दिखाया जा रहा है. जबकि मिल में पिछले पेराई सत्र में पूर्व की अपेक्षा 52 करोड़ रुपए का अधिक कारोबार किया गया था. चीनी मिल प्रबंधन ने समूचे उत्पादन के विरुद्ध कुल लगभग 196 करोड रुपए खर्च कर डाले, जिस में गन्ने का मूल्य भी शामिल है. मिल्की बैलेंस शीट में 255 करोड रुपए की देनदारी भी दिखाई गई है. यही नहीं प्रदेश सरकार द्वारा चीनी मिल का गन्ना भुगतान के लिए दिए गए ऋण पर ब्याज 21.30 करोड रुपए पहुंच चुका है.

बैलेंस शीट में श्रमिकों को वेतन भुगतान में गत वर्ष 37.43 करोड रुपए के मुकाबले इस बार 40.40 करोड रुपए खर्च किए गए हैं. बैलेंस शीट में विज्ञापन के नाम पर इस बार 9.40 लाख रुपए खर्च किए गए हैं जबकि पूर्व में 4.75 खर्च किए गए थे. साथ ही चीनी मिल के चौपहिया वाहनों की मरम्मत तथा गेस्ट हाउस के खर्चों में इस बार प्रबंधन ने कंजूसी बरती है, जबकि मिल में स्टेशन की खरीद में लाखों रुपए की वृद्धि दिखाई गई है.

मिल के प्रशासक कार्यालय खर्च के नाम पर वित्तीय अधिकारियों ने दरियादिली दिखाई है. चीनी मिल प्रबंधन ने मिल्क सप्लायर्स पर भी दरियादिली दिखाई है जिन्हें 7.88 करोड रुपए का एडवांस दिया गया है. सितारगंज से गन्ना आने के कारण मिल का गन्ना परिवहन खर्च भी 4 गुना बढ़ गया है. जो 1.81 करोड़ से बढ़कर 4.38 करोड़ हो गया है. साथ ही चीनी मिल प्रबंधन वसूली अभियान पर भी लापरवाही बरतने से पीछे नहीं हट रहा है जिसके कारण आंकड़ा 5.33 करोड़ पहुंच गया है। इन आंकड़ों से आप खुद ही पता लगा सकते हैं कि चीनी मिल पर करोड़ों रुपए का बकाया चल रहा है.

बाजपुर चीनी मिल पर लगातार बढ़ रहे उधार से चीनी मिल बंद होने की कगार पर पहुंच गई है. लगातार उधार में हो रही बढ़ोतरी जहां चीनी मिल को बंदी की कगार पर पहुंचा रही है तो दूसरी ओर कर्मचारियों के माथे पर नौकरी की दिक्कत मंडराने लगी है. चीनी मिल की बकाया धनराशि में कहीं न कहीं विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आ सकती है. अब देखने की बात है कि प्रदेश सरकार बाजपुर चीनी मिल को संजोए रखने के लिए क्या कदम उठाती है.


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