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तीन राज्यों में सरकार बनायेगी कांग्रेस

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Dec 11 2018 5:55PM
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नई दिल्ली. देश के पांच राज्यों पर हुए चुनाव के परिणाम पर न सिर्फ राजनीतिक दलों बल्कि आम लोगों की निगाहें भी टिकी थीं क्योंकि इसे 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा था. इन चुनावों की ख़ास बात यह रही कि कांग्रेस जहाँ इन चुनावों के परिणाम का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी और उसने मिठाई और फूलों का आर्डर दे दिया था. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सुबह से ही पटाखे चलाना शुरू कर दिया था लेकिन बीजेपी ने एक दिन पहले से ही यह कहना शुरू कर दिया था कि विधानसभा चुनाव को लोकसभा चुनाव से जोड़कर न देखा जाये.

बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही इन पांच राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी. प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी इन राज्यों में खुद तो दौड़ ही रहे थे साथ ही उन्होंने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को भी चुनाव जिताने की ज़िम्मेदारी सौंप दी थी. बावजूद इसके जनता ने इस चुनाव में बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस पर भरोसा किया है.

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने तीन बार के मुख्यमंत्री रमन सिंह का विजय रथ रोक दिया है. हालांकि रमन सिंह ने चुनाव जीतने के लिए अपने राज्य में मुफ्त के मोबाइल फोन भी बंटवाये लेकिन जनता ने बीजेपी को महज़ 17 सीटों पर समेट दिया. अब तक के रुझानों में कांग्रेस को 64 और बीएसपी को 9 सीटें मिलती नजर आ रही हैं. ऐसे परिणाम सामने आने के बाद रायपुर में बीजेपी दफ्तर पर सन्नाटा पसर गया है.

तेलंगाना की जनता ने टीआएस पर फिर से भरोसा जताया है. जनता ने टीआरएस को 87, कांग्रेस को 22 और बीजेपी को एक सीट दी है. 119 सीटों वाली तेलंगाना विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 60 है लेकिन टीआरएस ने अकेले दम पर 87 के आंकड़े को छू लिया है. के.सी.आर. की पार्टी को पहले से भरोसा था कि वह यह चुनाव पूरे बहुमत के साथ जीतेंगे. कल शाम उन्होंने अपने आवास पर एआईएमआईएम के अध्यक्ष सांसद असदुद्दीन ओवैसी को बुलाकर नयी सरकार के गठन को लेकर बात की थी. मुलाक़ात के बाद जब ओवैसी से यह पूछा गया था कि क्या वह सरकार को समर्थन देंगे तो उन्होंने कहा कि हम सरकार के साथ हैं लेकिन बहुमत के लिए सरकार को किसी की ज़रुरत नहीं पड़ेगी.

राजस्थान के चुनाव ने अपनी पुरानी परम्परा को कायम रखते हुए इस बार भी सत्ता को बदल देने का फैसला किया है. वसुंधरा राजे की सरकार इस परम्परा को तोड़ पाने में नाकाम रहीं और चुनाव परिणाम में उसी कांग्रेस को सत्ता वापस करती नज़र आयीं जिससे पांच साल पहले सत्ता हासिल की थी. 200 सीटों वाले राजस्थान में 199 सीटों पर हुए चुनाव में अभी जो हालात हैं उसमें कांग्रेस 101, बीजेपी 73 और अन्य 25 सीटों पर काबिज़ होते नज़र आ रहे हैं. सत्ता का जादुई आंकड़ा कांग्रेस के पास पहुँचता दिखाई दे रहा है.

मध्य प्रदेश में सत्ता पिछले 15 साल से बीजेपी के पास थी लेकिन राहुल गांधी पर भरोसा करते हुए मतदाताओं ने इस बार सरकार को बदलने का फैसला किया. मध्य प्रदेश की 230 सीटों में अब तक कांग्रेस 116, बीजेपी 105 और अन्य 9 सीटों पर काबिज़ होते नज़र आ रहे हैं लेकिन मध्य प्रदेश के चुनाव में हालत यह रही है कि ऐसे बहुत से प्रत्याशी हैं जिनके बीच 500 से भी कम अंतर है. यही वजह है कि दिन-भर सत्ता कभी बीजेपी के पाले में जाती नज़र आयी और कभी कांग्रेस की तरफ जाती दिखी.

मिजोरम की जनता ने एमएनएफ पर भरोसा जताते हुए उसे 26 सीटें दी हैं. कांग्रेस को 5 और बीजेपी को एक सीट देने का फैसला जनता ने किया है.

पांच राज्यों में हुए चुनाव के परिणाम देखने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष अपनी माँ और संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने 10 जनपथ पहुँच गए. राहुल को एक साल पहले 11 दिसम्बर को ही पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था. कांग्रेस अध्यक्ष बनने के ठीक एक साल बाद पार्टी की ज़ोरदार वापसी को राहुल गांधी के बेहतर भविष्य का संकेत माना जा रहा है.


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