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पीएम मोदी की यह योजना तो कागजों में ही सिमटकर रह गई

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Dec 21 2018 5:08PM
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रुद्र प्रताप सिंह

गोरखपुर. जनता को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार नई-नई योजनाओं को अमल में लाती है. इन योजनाओं को प्रचार-प्रसार के माध्यम से घर घर में लोगों तक पहुंचाया जाता है, लेकिन जब यही लोग इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए मौके पर पुहंचते है तो यह योजनायें खोखली साबित होती हैं. ताजा मामला गोरखपुर के जिला अस्पताल में मौजूद जन औषधि केन्द्र का है. जहां लोगों को सस्ती दवाई देने का दावा किया गया था. मगर सस्ती और अच्छी दवाएं उपलब्ध कराने के दावे सिर्फ कागजों में ही हैं.

प्रधानमंत्री की यह महत्वकांक्षी योजना व्यवस्था के सामने दम तोड़ती नजर आ रही हैं. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिला अस्पताल में मौजूद जो जन औषधि केन्द्र हैं, वहां सिर्फ 20 फीसदी दवाएं ही मौजूद हैं. इसमें भी सबसे ज्यादा जरूरी दवाईया नहीं  हैं. जिससे लोगों की आस टूट रही है, और जेब ढीली हो रही है.

मार्च 2017 में योजना की शुरुआत के बाद प्रदेश में एक हजार मेडिकल स्टोर खोले गए थे. इसमें से एक मेडिकल स्टोर गोरखपुर में भी खुला, लेकिन व्यवस्था की बात करें तो लोगों को अब भी सस्ती दवाओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. सरकार ने संख्या तो बढ़ा दी, लेकिन पर्याप्त मात्रा में दवाएं मुहैया नहीं कराई जा सकीं. स्टोर संचालकों के मुताबिक दवाएं मुहैया कराने वाले सेंट्रल वेयर हाउस पर ही इसकी कमी है. सभी जगहों पर दवाओं की कमी है. लोगों को सुलभ व सस्ता इलाज के लिए चलाई जा रही योजना पूरी तरह से सुस्त पड़ गई है.

शहर में इसके लिए खुले जन औषधि केन्द्रों पर दवाइयों की किल्लत हो गई है. इसके कारण यहां दवा के लिए आने वाले लोगों को निराशा ही हाथ लगती है. इन सेंटर्स पर दवाएं न मिलने की वजह से उन्हें मेडिकल स्टोर्स का सहारा लेना पड़ रहा है. इन केन्द्रों से सस्ती दवाएं पूरी तरह से गायब हो चुकी हैं.


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