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उत्तराखंड के इस इलाके में 41 साल से नहीं पहुँचीं सरकारी योजनायें

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Dec 23 2018 3:42PM
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ऋषिकेश. उत्तराखंड के ऋषिकेश में एक ऐसी जगह भी है जहाँ रहने वालों को पिछले 41 साल से सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला है. आईडीपीएल की कृष्णा लेबर कॉलोनी की आबादी 15 से 20 हजार के आसपास है, लेकिन यहां रहने वाले लोगों को 41 साल से सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला है. यहां के लोग लोकसभा और विधानसभा चुनाव में इसलिए बढ़-चढ़कर मतदान करते हैं कि चुनाव के बाद शायद उनकी किस्मत बदल जाये लेकिन चुनाव बीतने के बाद जनप्रतिनिधि इन्हें भूल जाते हैं. यहां रहने वाले लोगों का अब तक मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं.

लेबर कॉलोनी जिसे कृष्णानगर भी कहा जाता है. यहां केन्द्र की ओर से चलाई जा रही योजनाएं खासकर शौचालय, सौभाग्य योजना, विधवा पेंशन योजना, दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाएं नहीं पहुंच सकी हैं. यहां न तो कोई सरकारी स्कूल है और न ही कोई हॉस्पिटल है.

1977 में उत्तर प्रदेश सरकार के गजट नोटिफिकेशन में क्षेत्र को नोटिफाइड एरिया वीरभद्र के रूप में शामिल किया गया था और इस प्रस्ताव को तत्कालीन विशेष सचिव उत्तर प्रदेश शासन आर के सिंह ने 1998 में जिलाधिकारी देहरादून को आदेश दिया थे कि कृष्णा नगर कॉलोनी नगर पंचायत के मानकों को पूरा करता है, इसलिए प्रस्ताव शासन को भेजा जाए. इस मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी ऋषिकेश से जांच कराई और उपजिलाधिकारी ने पूरे क्षेत्र की जांच आख्या जिलाधिकारी को प्रेषित कर दी थी. नगर पंचायत के मानक पूरा करने की संस्तुति करते हुए 1991 की जनगणना के आधार पर निकाय के गठन की संस्तुति का प्रस्ताव भेजा गया जिसमें 13 वार्ड शामिल किए गए थे. नोटिफाइड एरिया बिग ब्रदर के पक्ष में जिला पंचायत राज अधिकारी का अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी हुआ.

इतना सब होने के बाद भी 41 सालों से यहां के निवासियों को मूलभूत सुविधाओं का अधिकार नहीं मिल पा रहा है. क्षेत्र के विधायक और विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल का कहना है कि वह लगातार इस क्षेत्र के लिए काम करते हैं, और विधायक निधि से सड़कें हैंड पंप लगाते रहते हैं. एक बार फिर वह इस मसले को उठाकर नगर निगम में शामिल कराने का प्रयास करेंगे. वहीं नगर नियोजन मंत्री मदन कौशिक का कहना है कि यह मामला अभी तक उनके संज्ञान में नहीं आया है. जैसे ही प्रस्ताव मिलेगा इस पर कार्रवाई की जाएगी.

एक बड़ी आबादी आज भी अपने हक से महरूम है, लेकिन शासन और प्रशासन इनकी कोई सुध नहीं ले रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि जोर शोर से केन्द्रीय योजनाओं का ढोल पीटने वाले राज्य के नेताओं को जनहित के मुद्दे क्यों नहीं दिखते हैं, और इन पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया जाता. आखिर कब कृष्णा लेबर कॉलोनी के लोगों की आवाज शासन के कानों तक पहुंचेगी और उनका लंबा इंतजार खत्म होगा.


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