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चीन और अमरीका से भी है बजरंगबली का रिश्ता

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Dec 23 2018 5:26PM
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आलोक पाण्डेय

लखनऊ. अगर हनुमान चालीसा पढ़े हैं तो उसमें पहली लाइन होती है जय हनुमान ज्ञान गुण सागर. हनुमान के ज्ञान की सागर के साथ तुलना की है. जो इस वक्त देश में बजरंगबली को लेकर चल रहा है, उनकी जाति को लेकर अलग-अलग नेताओं के जो बयान आ रहे हैं समझ में नहीं आता कि बजरंगबली को आखिर वह किस जाति का बता रहे हैं, बजरंगबली के साथ चल रहे विवाद से एक नई कहानी निकल कर आ रही है द लॉस्ट सिटी ऑफ मंकी किंग यह चाइना की लिखी किताब है. जहां पर कहा जाता है कि वहां पर एक बंदर राजा हुआ करते थे. मतलब अब बजरंगबली का संबंध चीन से भी जोड़ दिया गया है. हैरान करने वाली चीज है कि बजरंगबली की बड़ी प्रतिमा और सोने के भंडार के साथ अंदर उसमें मिली है जो कि मध्य अमेरिका के पास है हुन्ड्रस, भारत से निकल के हुन्ड्रस की यात्रा में हम जाने की कोशिश करते हैं.

यूपी के सीएम योगी ने कहा कि बजरंगबली दलित हैं. तो किसी ने कहा कि बजरंगबली जाट हैं तो किसी ने कहा कि बजरंगबली मुसलमान हैं. किसी ने कहा कि बजरंगबली चीन से यही चीन की बात से हम आपको शुरू करते हैं कि बजरंगबली भारत देश के हैं इसमें कोई शक नहीं है.

बजरंगबली चीन से हैं यहीं से बजरंगबली की एक नई कहानी शुरू होती है. अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. वाई.पी. सिंह का कहना है कि चीन के साथ बजरंगबली का रिश्ता कोई हवा हवाई नहीं है. इसमें सच्चाई है. चीन में वह मंकी किंग के नाम से जाने जाते हैं. और चीन से शुरू होकर के हुन्ड्रस मध्य अमेरिका कई जगह है जहां पर भगवान बजरंगबली की यात्रा खत्म होती है.

बताया जाता है कि बहुत समय पहले इसे हुनड्रस में यहां के घने जंगलों में भगवान बजरंगबली की बहुत बड़ी मूर्ति और उनके आस पास बहुत सारा सोना मिला था. डॉ. सिंह के मुताबिक वहां पर जो समुद्री चोर या लुटेरे का आ जाए उन्होंने इस मूर्ति को खोजा उन्हें यह मूर्ति मिली उसके बाद फिर जो आर्कलॉजिकल साइंटिस्ट होते हैं वहां पर उस पर काम करने लगे. बहुत कुछ जानकारी बहुत कुछ ऐतिहासिक जानकारी निकल कर आ रही है. एक पूरा साहित्यिक और लौकिक रिश्तों की बात की जाए तो बजरंगबली का चीन और और भारत से रिश्ता निकल रहा है.

अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक कहते हैं कि साफ है कि बजरंगबली पूरे इस ब्रह्मांड में व्याप्त रहे हैं, और वह सिर्फ भारत के नहीं बल्कि दुनिया भर में रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर हमारे वैज्ञानिक इस को ठीक से शोध करते तो और भी बहुत कुछ निकल सकता है. उनका कहना है कि जितना उन लोगों ने शोध किया है उससे न सिर्फ बजरंगबली भारत चीन और हुनड्रस, अमेरिका तक पहुंचते हैं बल्कि इसी के साथ संस्कृत भाषा यह जो हमारे वेद पुराण की बात है उसका भी रिश्ता निकलता है तो कुल मिलाकर के हमारे देश की संस्कृति हमारे देश की परंपरा और हमारे देश के देवी देवता ही चारों तरफ हैं. हम हुनड्रस में मिली यह मूर्ति उसी का सबूत देती है. वह अपनी इस बात को किताब के माध्यम से भी दिखाते हैं. इस किताब को देखिए इस के चित्रों को देखें और फिर अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक की यह बातें सुनी हैं कि वह किस तरह से बजरंगबली का रिश्ता भारत से लेकर चीन और चीन से लेकर हुनड्रस तक बताते हैं.

बजरंगबली के साथ कोई नया विवाद ना छोड़ जाए. अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक कहते हैं कि कोई फिक्र नहीं क्योंकि उनके पास तर्क है. उनके पास इसके आधार हैं. यही नहीं हुंडरू से उनको बुलाया भी गया है, कि वह खुद आकर इस मूर्ति को देखें और समझने की कोशिश करें. उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से उन्हें ग्रीन सिग्नल भी मिल गया है, कि वह जाएं उनके पास व्हाइट पासपोर्ट भी है. जिसका मतलब है क्यों नहीं कहीं भी आने-जाने के लिए कोई रोक टोक नहीं है. अब वह कब जाते हैं यह उन पर निर्भर करता है. लेकिन जातियों से निकले हुए बजरंगबली को लेकर के अब अयोध्या का यह शोध संस्थान कम से कम इस बात के लिए प्रयासरत है कि बजरंगबली की जाति से ज्यादा उनकी व्यापकता का पता चल जाये.


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