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वंदेमातरम् के समर्थन से परेशान है एक मुस्लिम परिवार

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Dec 28 2018 3:19PM
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आगरा. ताजनगरी आगरा में वन्देमातरम का समर्थन करना एक मुस्लिम परिवार को इतना महंगा पड़ गया कि पूरे परिवार पर कई बार जानलेवा हमला हो चुका है. आरोप है कि परिवार ने अपने ऊपर हुए हमले की कई बार पुलिस में शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. डरे सहमे परिवार ने अब सोशल मीडिया का सहारा लिया है.

सोशल मीडिया में एक पोस्ट वायरल हो रही है. जिसमें उन्होंने अपने दोनो बच्चों को गोद देने की बात कही है. बताया जा रहा है कि बीते 18 दिसम्बर को गुलचमन एक जनाजे में शामिल होने पहुंचे थे. तभी उसके मोबाइल पर वन्देमातरम की रिंगटोन बजने लगी. इसी पर  कुछ लोगों ने पहले तो गुलचमन के साथ अभद्रता की और उसके साथ मारपीट की. जब पीड़ित ने इसकी शिकायत पुलिस से की तो कोई कार्रवाई नहीं हुई. थक हारकर अब पीड़ित परिवार ने सोशल मीडिया का सहारा लिया है.

अब इस मुस्लिम परिवार ने अपने बच्चों की जान बचाने की खातिर सोशल मीडिया का सहारा लिया है. सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए अपने दोनों बच्चों को एक ऐसे परिवार को गोद देने की बात लिखी है जो नि:संतान राष्ट्रवादी परिवार हो. आगरा के पृथ्वीनाथ रेलवे फाटक के पास बसी मुस्लिम बस्ती में रहने वाला यह गुलचमन शेरवानी का परिवार है. परिवार में पत्नी हिना नाज शेरवानी, बेटा गुलवतन शेरवानी और बेटी गुलसनम शेरवानी हैं. अपने घर में बैठा यह परिवार इन दिनों काफी परेशान है. इस परिवार की परेशानी न तो आर्थिक संकट है और न ही कोई और वजह. गुलचमन शेरवानी की परेशानी का सबब वन्देमातरम का समर्थन करना है. देश भक्ति और वन्देमातरम के प्रति आस्था गुलचमन शेरवानी के लहू में बसी हुई है. यही वजह है कि उसके घर में हर ओर देश की आन, बान और शान राष्ट्रीय तिरंगे के रूप में नजर आता है. इतना ही नहीं गुलचमन शेरवानी और उसका परिवार तिरंगा रूपी कपड़े भी पहनता है. देश  और वन्देमातरम के प्रति सम्मान करने वाले गुलचमन शेरवानी पर कट्टरपंथियों द्वारा जान लेवा हमले किये गए.

मुस्लिम समाज द्वारा गुलचमन शेरवानी के प्रति फतवा तक जारी कर दिया गया. बाबजूद इस सबके गुलचमन शेरवानी का वन्देमातरम के प्रति भाव कम नहीं हुआ तो गुलचमन और उसके परिवार पर हमलों का सिलसिला शुरू हो गया. कई बार पुलिस से शिकायत की गयी लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं हुई. लेकिन हाल ही में बीते 18 दिसम्बर को तिरंगा रूपी वस्त्र पहनकर गुलचमन शेरवानी एक जनाजे में शामिल होने के लिए कब्रिस्तान पहुंचा था. तभी उसके मोबाइल पर वन्देमातरम की रिंगटोन बजने लगी. इसी पर कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट कर दी.

मामला मारपीट तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि उसके साथ अमानवीय व्यवहार भी किया गया. गुलचमन ने अपने साथ हुई मारपीट और अमानवीय घटना की जानकारी डायल 100 पुलिस को दी. मौके पर पहुंची पुलिस ने गुलचमन को मारपीट करने वाले लोगों से बचाया और उसे घर छोड़ गयी. अपने साथ हुई घटना की तहरीर लेकर गुलचमन थाने पहुंचा तो उससे तहरीर तो ले ली लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गयी.

गुलचमन शेरवानी को अब अपने परिवार पर खतरा दिखाई दे रहा है. इसी वजह से गुलचमन और उसकी पत्नी ने अपने बच्चों की जान बचाने की खातिर खुद से दूर करने का फैसला कर लिया है. गुलचमन का कहना है कि मैं और मेरी पत्नी भले ही ज़िंदा न रहें पर हमारे बच्चे जरूर ज़िंदा रहें, इसलिए अब हमने अपने दोनों बच्चों को एक ऐसे परिवार को गोद देने का मन बना लिया है जो नि:संतान होने के साथ साथ राष्ट्रवादी भी हों.

गुलचमन शेरवानी ने सोशल मीडिया पर किये गए पोस्ट में लिखा है कि मेरे प्यारे देश वासियों मैं अपनी बेटी गुलसनम शेरवानी जिसका जन्म 15 अगस्त 2010 और अपने बेटे गुलवतन शेरवानी जिसका जन्म 26 जनवरी 2013 को हुआ, जिनको मैं एक नि:संतान राष्ट्रवादी परिवार को गोद देना चाहता हूँ. क्योंकि मुझे और मेरे परिवार को जान का खतरा है. मैं नहीं चाहता कि मेरे साथ मेरे बच्चे भी कट्टरपंथियों का निशाना बने।सोशल मीडिया पर किये गए पोस्ट में गुलचमन में सरकार को भी घेरा है उसने लिखा है कि मैं सरकार की दोहरी नीति का शिकार हो रहा हूँ.

एक ओर सरकार ने वन्देमातरम गीत को राष्ट्रीय गीत घोषित कर रखा है वही इसका विरोध करने वाले लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई  नहीं कर रही है. गुलचमन शेरवानी की पत्नी हिनानाज शेरवानी का कहना है कि मेरे पति और परिवार कई बार हमले हुए है और अब हम नहीं चाहते कि हमारे बच्चे इस हमले का शिकार हों. इसलिए अब हमने अपने दोनों बच्चों को गोद देने का फैसला कर लिया है.

हिना नाज शेरवानी बहरहाल गुलचमन अपने ऊपर हो रहे हमले से परेशान है और ऐसे में गुलचमन और उसकी पत्नी हिनानाज अपने कलेजे के टुकड़ों को सही सलामत रखने के लिए पहाड़ सा फैसला किया है. गुलचमन और उसके परिवार का देश और वंदेमातरम् के प्रति भाव और उसकी निडरता किसी मिसाल से कम नहीं है.


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