आप यहां हैं : होम» अपराध

फर्जी महिला पेंशनर के नाम पर हुआ करोड़ों का घोटाला

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Jan 6 2019 12:30PM
koshagar hardoi_201916123011.jpg

नितेश चन्द्र शुक्ला

हरदोई. जिले में ट्रेजरी के महाघोटाले का पर्दाफाश हुआ है. राजधानी से सटे जनपद हरदोई में उजागर हुआ है प्रदेश का सबसे बड़ा घोटाला. महिला को फर्जी पेंशनर बनाकर कोषागार के अधिकारियों ने लुटाया करोड़ों का सरकारी खजाना. 20 से 25 अकाउंट में ट्रांसफर हुए लगभग 28 करोड़ रुपये. इस घोटाले में कई बड़े अफसर भी शामिल हैं.

इस महिला के खाते में एक माह में तीन-तीन बार पेंशन के रूप में करोड़ों रुपये भेजे गए.

हरदोई जिला कोषागार में विभागीय मिलीभगत से एक महिला को फर्जी पेंशनर बनाकर उसके खाते में हर माह लाखों रुपये भेजे गए. इस तरह करीब 4 साल में कई करोड़ सरकारी रुपये ट्रेजरी से महिला के विभिन्न बैंक अकांउट में भेज दिए गए, और किसी को भनक तक नहीं लगी.

जिले के समाजसेवी व वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष सिंह ने आरटीआई के ज़रिये इस घोटाले का पर्दाफाश किया. नेशनल वॉइस की टीम ने जब इसकी पूरी पड़ताल की तो इसका पूरा खुलासा हुआ. इस पूरे घोटाले में कोषागार के अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं. साथ ही इस घोटाले में कई आईएएस अफसर भी शामिल हैं.

जानकारी मिली है कि हर माह की फर्जी पेंशन भेजने के लिए फर्जी पीपीओ नंबर का प्रयोग किया गया. जबकि एक पेंशनर के लिए सिर्फ एक ही पीपीओ नंबर का प्रयोग किया जाता है. नेशनल वाइस को  मिले महत्वपूर्ण दस्तावेज के अनुसार मधुलता सिंह नाम की महिला के एसबीआई बैंक के खाते में जिला कोषागार से वर्ष 2011 में 25 अगस्त को 142345 रुपये, 24 अक्टूबर को 333679 रुपये, वर्ष 2012 में 6 जून को 375407 रुपये, 6 जुलाई को 462342 रुपये, वर्ष 2013 में 10 मई को 509711 रुपये, 30 मई को 9899 रुपये, 27 जून को 9899 रुपये, 29 जुलाई को 13119 रुपये, 30 अक्टूबर को 352732 रुपये, 29 नवम्बर को 10359 रुपये और वर्ष 2014 में 3 फरवरी को 24750 रुपये, 14 फरवरी को 217223 रुपये, 26 फरवरी को 10935 रुपये, 5 अप्रैल को 10935 रुपये, 29 अप्रैल को 10935 रुपये, 4 जून को 13810 रुपये, 28 जून को 11510 रुपये, 28 जुलाई को 11510 रुपये, 28 अगस्त को 11510 रुपये, 30 सितम्बर को 11510 रुपये, 28 अक्टूबर को 11510 रुपये, 28 नवम्बर को 11510 रुपये, 27 दिसम्बर को 11510 रुपये जमा किये गए.

इसी तरह वर्ष 2015 में 2 फरवरी को 14331 रुपये, 27 फरवरी को 11913 रुपये, 6 अप्रैल को 11913 रुपये, 29 अप्रैल को 11913 रुपये, 29 मई को 11913 रुपये का भुगतान किया गया है.

कई बार एक माह में 3 व दो- दो बार उक्त महिला के खाते में लाखों रुपये पेंशन के नाम पर भेजे गए. यही नहीं कोषागार के दस्तावेज में उक्त महिला की जन्मतिथि तीन बार परिवर्तित कर दर्शाई गई है. इससे संदेह है कि मधुलता नाम की महिला को फर्जी पेंशनर बनाकर कोषागार का राजकीय कोष उसके खाते में भेजकर विभागीय अधिकारी व कर्मचारी मालामाल हुए हैं. इस पूरे घोटाले में शामिल अधिकारियों व कर्मचारियों को बेनकाब करने के लिए हमारे चैनल की टीम जुटी हुई है.

इस घोटाले पर कोई भी अधिकारी अपना मुंह खोलने को तैयार नहीं है. विदित हो कि तत्कालीन वरिष्ठ कोषाधिकारी के कार्यकाल में घोटाला किया गया. उसमें आयकर विभाग की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता.


देश-दुनिया की अन्य खबरों और लगातार अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें। आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं।