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केदार यात्रा में चुनौती बन सकते हैं ग्लेशियर

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: May 12 2019 10:02AM
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रुद्रप्रयाग. केदारनाथ यात्रा का विधिवत आगाज हो गया है. कपाट खुलने के बाद से हजारों की संख्या में श्रद्धालु बाबा केदार के दरबार में पहुंच रहे हैं. लिनचैली से केदारनाथ धाम के बीच ग्लेशियरों से होकर गुजर रहे तीर्थयात्रियों में उत्साह देखने को मिल रहा है. उनकी मानें तो इससे पहले उन्हें ऐसा नजारा कभी देखने को नहीं मिला. कुछ दिनों बाद केदाघाटी में हेलीकाप्टर सेवाएं शुरू होने जा रही हैं. ऐसे में हवाई सेवाओं के गर्जनाओं से ग्लेशियरों के टूटने का खतरा है. ग्लेशियर को लेकर प्रशासन चिंतित नजर आ रहा है, जिस कारण वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालियन जियोलाजिकल को रिसर्च के लिए बुलाया गया है.

इस वर्ष जनवरी शुरूआत से ही केदारनाथ धाम में भारी बर्फवारी और बारिश हुई है. करीब चार माह तक यह सिलसिला जारी रहा. बर्फवारी के कारण केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्यों में ब्रेक लग गया तो समय से केदार यात्रा की तैयारियां भी शुरू नहीं हो पाईं. जैसे-तैसे प्रशासन की ओर से यात्रा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया गया है. कम समय और बहुत सी चुनौतियां होने के बावजूद यात्रा को शुरू किया गया.

कपाट खुलने के बाद से केदारनाथ धाम में तीर्थयात्रियों का हुजूम उमड़ने लगा है. पहले ही दिन छह हजार से ज्यादा तीर्थयात्रियों ने भगवान केदारनाथ के दर्शन किये तो दूसरे दिन 11,499 तीर्थयात्री केदार बाबा के दर्शन कर चुके हैं. अभी केदारधाम जाने वाले तीर्थयात्री गौरीकुण्ड-केदारनाथ पैदल मार्ग से यात्रा कर रहे हैं और तीर्थयात्रियों को हिम ग्लेशियरों से होकर गुजरना पड़ रहा है. भले ही श्रद्धालुओं को ये ग्लेशियर पसंद आ रहे हैं, लेकिन इन ग्लेशियरों से काफी खतरा भी है. यात्रा के समय ये ग्लेशियर प्रशासन के लिए चुनौती बन सकते हैं. बारिश के दौरान ग्लेशियरों से परेशानी खड़ी हो सकती है और कुछ दिनों बाद शुरू हो रही हेलीकाप्टर सेवाओं की गर्जनाओं से ग्लेशियरों के टूटने का भय बन गया है. ऐसे में ग्लेशियरों को पिघलाने और उन्हें हटाने के लिए प्रशासन की ओर से योजना बनाई जा रही है. इसके लिए प्रशासन ने वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालियन जियोलाजिकल की टीम को रिसर्च के लिए बुलाया है. जो ग्लेशियर पर रिसर्च करेंगे, और ग्लेशियरों को पिघलाने का कार्य भी करेंगे, जिससे जल्द से जल्द पैदल रास्ते से ग्लेशियर को साफ किया जा सके.

जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि लिनचैली से केदारनाथ के बीच पांच बड़े-बड़े ग्लेशियर मौजूद हैं, जिनकी ऊंचाई 18 से 20 फीट है. बर्फवारी और बारिश के बंद होने के बाद 25 मार्च से पैदल मार्ग पर काम करवाया गया, जिससे यात्रा से पूर्व ही पैदल मार्ग को तैयार किया गया है. रास्ते को तैयार करने से आस-पास बड़े-बड़े ग्लेशियर दिख रहे हैं, जिनके गिरने का भी डर बना हुआ है. बारिश के समय ये ग्लेशियर मुसीबत पैदा कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि आयुक्त गढ़वाल डॉ. बीवी आरसी पुरूषोत्तम ने लिनचैली से केदारनाथ निरीक्षण के दौरान वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालियन जियोलाजिकल से रिसर्च करवाने को कहा है.

उन्होंने बताया कि केदार यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है. तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को लेकर ग्लेशियर वाले स्थानों पर एसडीआरएफ के जवानों की तैनाती की गई है, जिससे कोई भी परेशानी होने पर तेजी से रेस्क्यू किया जा सके.


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