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धू-धू कर जल रहा जंगल, कार्रवाई के नाम पर चल रही फाइलें

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: May 30 2019 11:32AM
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रुद्रप्रयाग. जिले के जखोली, अगस्त्यमुनि और ऊखीमठ विकासखण्ड के जंगल धू-धू कर जल रहे हैं. आग के कारण चारों ओर धुंआ ही धुंआ दिखाई दे रहा है. जंगलों में लगी आग शहरी इलाकों से ग्रामीणों की दहलीज तक पहुंच गई है. कलक्ट्रेट भवन, पुलिस अधीक्षक आवास के साथ ही आस पास बने आवासीय भवनों तक आग की लपटें आ चुकी हैं. बावजूद इसके वन महकमा कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है. आरोप है कि वन विभाग को सूचना देने पर भी कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है. जंगलों में चारों ओर धुंध ही धुंध फैली हुई है. धुंध के कारण लोगों की आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत आ रही है. जिले की कई हेक्टेयर वन सम्पदा राख हो चुकी है, जबकि जंगली जानवरों के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. ग्रामीणों के सामने चारापत्ती की समस्या भी खड़ी हो गई है. तो प्राकृतिक जल सोत्र भी सूखने के कगार पर हैं. ग्रामीण जनता स्वयं ही आग बुझाने में लगी हुई है, मगर बिना संसाधनों के आग पर काबू पाना मुश्किल है.

चारों ओर फैली धुंध के कारण दोपहर तक भी मौसम नहीं खुल पा रहा है, जिससे देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों को सफर करना मुश्किल हो रहा है.

वन महकमे के पास संसाधन तो हैं, लेकिन वे संसाधन उपयोग में नहीं लाये जा रहे हैं. सरकार में वन पंचायत के अध्यक्ष (राज्य मंत्री) वीरेन्द्र बिष्ट का कहना है कि आग को बुझाने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने माना कि वन महकमे के पास संसाधनों की कमी है. उन कमियों को दूर करने के प्रयास किये जा रहे हैं. अधिकारियों का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि अधिकारी व कर्मचारी आग को बुझाने के प्रयास में जुटे हुए हैं. घरों तक आग न पहुंचे और मवेशियों को कोई नुकसान न हो, इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन राज्यमंत्री का यह बयान जनता की समझ से परे लग रहा है.

जंगलों में लग रही आग से शहरी एवं ग्रामीण इलाकों की जनता के साथ ही तीर्थयात्रियों को भी भारी परेशानी हो रही है. जिला अस्पताल के साथ ही अन्य स्वास्थ्य केन्द्रों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है. सबसे अधिक मरीज आंखों में जलन और सांस लेने की समस्या को बता रहे हैं. घर के बाहर आने पर आंखों में जलन होने से आँखें लाल हो रही हैं. यह सब कुछ वनों में लग रही आग के कारण हो रहा है. जंगलों की आग ने लोगों को बीमार कर दिया है.

जिला अस्पताल में ओपीडी की संख्या बढ़ने से वार्डों की कमी पड़ गई है. मरीजों को भर्ती करने के लिए जगह नहीं है. स्वस्थ लोग बीमार पड़ रहे हैं. इसके अलावा जंगलों में लगी आग का असर तीर्थयात्रियों पर भी पड़ रहा है. चारों ओर फैली धुंध के कारण दोपहर तक भी मौसम नहीं खुल पा रहा है, जिस कारण देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों को सफर करना मुश्किल हो रहा है. ऐसे में वे देवभूमि से अच्छा संदेश लेकर नहीं जा रहे हैं.

वहीं जिलाधिकारी का कहना है कि शासन स्तर से निर्देश हैं कि आग की घटना को आपदा की घटना की तरह लिया जाय. जिला का पूरा तंत्र आग की घटना पर कार्य करेगा. शुरूआती आग की घटनाओं में वन विभाग ने कंट्रोल रूम लगाया है. वृहद स्तर पर आग की घटना होने पर वन विभाग की ओर से मांग करने पर जिला आपदा प्रबंधन विभाग भी कार्य करेगा. उन्होंने कहा कि आग की घटनाओं पर नजर रखी जा रही है और त्वरित गति से सूचना वन महकमे तक पहुंचाई जा रही है.

बहरहाल, कुल मिलाकर देखा जाय वनाग्नि की घटना को लेकर वन महकमा किसी भी स्तर से सजग नहीं दिखाई दे रहा है. जंगलों में लगी आग से मनुष्य से लेकर मवेशी और जंगली जानवर परेशान हैं.


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