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करोड़ों रुपए से बना शिवपुर का राजकीय अस्पताल है खस्ताहाल

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Jun 6 2019 5:27PM
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वाराणसी. शिवपुर के राजकीय अस्पताल का हाल खस्ताहाल है. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शिवपुर राजकीय अस्पताल पर करोड़ों रुपए खर्च कर के अस्पताल की बिल्डिंग का नवनिर्माण कराया गया. जिसका उद्घाटन स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने किया. आधुनिक तकनीकी से लैस लगभग 30 बेड वाले इस अस्पताल में लगभग एक दर्जन डॉक्टर तैनात हैं. कागज पर 24 घंटे चलने वाला यह अस्पताल 8:00 बजे खुलकर 2:00 बजे बंद हो जाता है.

आसपास के लगभग 4 से 5 लाख की आबादी वाला यह अस्पताल जिसे सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च कर बनवाया लेकिन इस अस्पताल में सिर्फ ओपीडी में ही मरीजों को देखा जाता है. अगर दिन में किसी तरह मरीज को भर्ती कर लिया गया तो उसे 2:00 बजे तक छोड़ दिया जाता है. चाहे उस मरीज की कंडीशन जिस तरह की भी हो. मरीज और उनके परिजन धरती के भगवान के पास इसलिए आते हैं की उनके जीवन की रक्षा डॉक्टरों के हाथ में है, लेकिन सरकारी व्यवस्था के आगे मरीज और उनके परिजन घुटना टेक देते हैं. अगर मरीज को भर्ती करने की बात अगर आती है तो उसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय या मंडलीय अस्पताल भेज दिया जाता है. हालांकि इस अस्पताल में 24 घंटे ड्यूटी है जो सिर्फ कागजों पर है. अगर कोई मरीज रात में अस्पताल में पहुंचता है तो अस्पताल का ताला बंद होता है और चारपाई पर लेटा वार्ड बॉय मरीज के परिजन को बाहर से ही यह कहते हुए विदा कर देता हैं कि डॉक्टर साहब घर पर हैं.

लाखों रुपए तनख्वाह के रूप में पाने वाले डॉक्टर रात्रि में अपने परिवार के साथ एसी आनंद लेते हुए आराम फरमा रहे होते हैं, एक तरफ सरकार तमाम तरह के वादे कर रही है लेकिन व्यवस्था जस की तस आखिर इस तरफ अभी तक प्रशासन की नजर भी नहीं है. रही बात मंत्री जी की तो उन्होंने तो अपना काम कर दिया सरकारी धन से अस्पताल का निर्माण करा दिया और 23 अप्रैल 2017 को अस्पताल का फीता काटकर उद्घाटन भी कर दिया. उसके बाद मंत्री ने उद्घाटन के बाद आज तक इस अस्पताल की स्थिति के बारे में जानने की  जरूरत नही समझी.

सही मायने में तो इस अस्पताल की स्थिति बद से बदतर है. दवाइयां तक उपलब्ध नहीं हैं. डॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया कि ऐसे तो 24 घंटा यह अस्पताल चलता है लेकिन शाम को डॉ. घर चले जाते है जब कोई इमरजेंसी कॉल आती है तो डॉक्टर आते हैं. लगभग चार करोड़ रुपए की लागत से यह अस्पताल बना है. यहां पर नर्स, फार्मासिस्ट बार्ड व्याय रहते हैं. यहां मरीज के लिए टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध है. पैथोलॉजी है, ओपीडी है और इंडोर थोड़ा बहुत चलता है.


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