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पुलिस से इन्साफ नहीं मिला तो उसने खा लिया ज़हर

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Jun 20 2019 1:03PM
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रामपुर. इंसाफ न मिलने से परेशान और पुलिस की कार्यशैली से हताश एक पत्रकार ने एसपी ऑफिस में जहर खा लिया. मामला गंज थाना क्षेत्र का है. जहां पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि उसका अपने सगे भाईयों से सम्पत्ति का विवाद चल रहा है. जिस मामले में वह लगातार रामपुर पुलिस से इंसाफ दिलाने की गुहार लगा रहा है, लेकिन पुलिस उसे इंसाफ दिलाने की जगह उसका उत्पीड़न करने में जुटी हुई है. पत्रकार के जहर खाने की घटना से कार्यालय में अफरा तफरी मच गई और पुलिसकर्मी उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल ले गए. जहां पर उसका उपचार चल रहा है.

उत्तर प्रदेश में एक के बाद एक पत्रकार उत्पीड़न की घटनाएं सामने आ रही हैं. पत्रकारों के हितों की सुरक्षा को लेकर गंभीर दिख रही योगी सरकार के निर्देशों को पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार ठेंगा दिखाया जा रहा है. कुछ इसी तरह का एक मामला रामपुर में सामने आया है, यहां पर एक पत्रकार ने पुलिस अधीक्षक के गोपनीय कार्यालय में उस समय जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया, जब वह किसी मामले को लेकर पुलिस की कार्यशैली से हताश हो गया.

रामपुर में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बतौर जिला संवाददाता कार्यरत उबेद खान का जमीन जायदाद को लेकर एक विवाद अपने सगे भाइयों से चल रहा है. वह इंसाफ के लिए लगातार अपने गृह क्षेत्र के थाना गंज पुलिस से इंसाफ की गुहार लगा रहा था, लेकिन पुलिस उसकी मदद करने के बजाय उसी का उत्पीड़न करने पर उतारू हो गई. दो माह पहले उसे अपने भाई की पुलिस से शिकायत करने की सजा थाने में बनी हवालात में बंद होकर भुगतनी पड़ी थी.

पीड़ित पत्रकार लगातार गंज पुलिस से इंसाफ की गुहार लगाता रहा, लेकिन उसे कहीं भी इंसाफ नहीं मिल पा रहा था. अंत में उसने इंसाफ पाने के लिए पुलिस कप्तान की चौखट पर दस्तक दी और सारे घटना क्रम से वहां तैनात पुलिसकर्मियों को अवगत कराया और देखते ही देखते उसने पुलिस कप्तान के आवास स्थित कार्यालय पर जहरीले पदार्थ का सेवन कर आत्महत्या का प्रयास किया. पत्रकार के जहर खाने की घटना से कार्यालय में अफरा तफरी मच गई और पुलिसकर्मी उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल ले गए. जहां पर उसका उपचार चल रहा है.

पीड़ित पत्रकार के मुताबिक उसके पिता पीडब्ल्यूडी में कार्यरत थे. जिनकी वर्ष 2000 मैं मतदान के दौरान  बूथ पर गोली लगने से मौत हो गई थी. जिसके बाद मृतक आश्रित के रूप में उसके बड़े भाई शुऐब खान को नौकरी मिली थी. बावजूद इसके भाई ने उसके पुश्तैनी प्लॉट पर भी कब्ज़ा कर लिया. जिसकी शिकायत वह बार-बार गंज पुलिस से करता चला रहा है. पुलिस उसकी मदद करने के बजाय उसका ही उत्पीड़न करने पर उतारू है. इसी उत्पीड़न और गंज कोतवाल के उदासीन रवैये के कारण उसने जहर खा लिया.


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