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वह पानी पर बैठने का हुनर जानते हैं

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Jun 20 2019 3:04PM
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आगरा. अगर आपको किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में बताया जाए जो पानी में बड़े आराम से घंटों बैठने के अलावा लेटने के साथ-साथ विभिन्न मुद्राओं में योग व करतब दिखा सकता है तो शायद आपको किसी दंतकथा का आभास हो, मगर चौंकिये नहीं यह सच है. शहर के एक वकील हरेश चतुर्वेदी ऐसे ही व्यक्ति हैं, जो बड़ी आसानी से ये सब कर लेते हैं. यकीन न आये तो आइये आप भी देख लीजिये.

21 जून विश्व योग दिवस के रूप में मनाया जाता है, और तरह-तरह के योग किये और दिखाए जाते हैं लेकिन हम आज आपको एक अलग तरह के योग के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में आपने शायद न सुना हो और न देखा हो. हम बात कर रहे हैं जलयोग की.

जल की सतह पर योगासन करना और घंटों तक योगासन की मुद्रा में सतह पर बने रहना आपको सुनने में कुछ अजीब सा ज़रूर लगेगा परन्तु ताजनगरी आगरा में इसके एक एक्सपर्ट भी हैं. जी हाँ शहर के जाने माने क्रिमनल वकील हरेश चौबे को इसी योगासन में महारथ हासिल है. पेशे से वकील और आध्यात्म में विश्वास रखने वाले हरेश चौबे को इस हुनर में माहिर होने के लिए दो महीने का समय लगा. खंदारी निवासी हरेश चौबे ने आठ साल पहले पानी में योग करने का अभ्यास शुरू किया, हर रोज दो घंटे का अभ्यास और अपनी लगन से महज दो महीने में किताबों में लिखी कल्पना को साकार करने में सफल हो गये.

हरेश ने संत महात्माओं के पानी में योग करने के किस्से सुने थे इसी बात ने उन्हें प्रेरणा दी और शुरू हो गया प्रतिदिन का अभ्यास. अब वह पानी की सतह पर घंटों प्राणायाम, पद्मासन, ब्रह्मासन, ताड़कासन, गरुणसन की मुद्रा में खड़े और बैठे रहते हैं. लगभग चार घंटे तक लगातार वो ये योग पानी पर कर सकते हैं.

वो कहते हैं कि यह एक तपस्या है जिसे सीखने के लिए योग और तैराकी आना ज़रूरी है. वो कहते हैं कि इस कार्य को करते समय कई खतरे भी हैं लेकिन उनके ऊपर इष्ट देव की कृपा रहती है. पानी पर योग अपेक्षाकृत अधिक फायदेमंद है. इसके करने से रक्त प्रभाव सुचारू रहता है यह व्यक्ति को मानशिक रोग के साथ विशेषकर ह्रदय और फेफड़ों के रोग से दूर रखता है.

आज आगरा के एक निजी स्कूल के स्विमिंग पूल पर इस योग का प्रदर्शन किया गया. जहाँ शहर के वरिष्ठ लोगों ने जमकर चौबे जी के अद्भुत खेल व योग का आनंद लिया और सराहना की. योग गुरु हरेश का बस अब एक ही सपना है कि किसी तरह सरकार उनका साथ दे ताकि वो इस हुनर में लोगों व आने वाली पीढ़ी को माहिर कर सकें. और राष्ट्रीय स्तर पर इसे खेल का रूप दे सकें. बस जरुरत है तो कुछ ऐसे हाथों की जो उनकी मदद को आगे आयें, ताकि ऋषि मुनियों की इस परंपरा को आगे बढ़ाया जा सके.


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