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भीषण गर्मी में सिमटने लगी गंगा

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Jun 22 2019 4:54PM
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वाराणसी. भीषण गर्मी की वजह से जीवनदायनी गंगा सिमटने लगी है. लगातार कम हो रहे पानी की वजह से गंगा घाटों से कोसों दूर हो चुकी है. आलम ये है कि घाटों पर गंगा के दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को काफी दूर तक पैदल चलना पड़ता है. तब कहीं जाकर उन्हें गंगा की धारा दिखाई देती है, लेकिन इस वक्त गंगा की जो धारा बह रही है, उसे देख कर आचमन करने का मन तो कतई नहीं करेगा.

अविरल और निर्मल गंगा के लिए चलाई जा रही करोड़ों की योजनायें गंगा की हालत को देख कर बेइमानी नजर आ रही हैं. स्थानीय लोगों की मानें तो पिछले दो-तीन दशक में गंगा का जल स्तर इतना नीचे कभी नहीं गया. जल स्तर कम होने की वजह से गंगा के तट से दो किलोमीटर तक के एरिया में हैंडपंपों ने जवाब दे दिया है. जिसकी वजह से पीने के पानी की किल्लत दिन पर दिन गहराती जा रही है.

गंगा के लगातार सिमटने को लेकर जल वैज्ञानिक भी चिंता में हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर गंगा सूखी, तो करोड़ों लोगों के जीवन पर संकट मंडराने लगेगा.

एक तरफ सरकार गंगा निर्मली करण और अविरल गंगा बनाने के लिए कटिबद्ध है जिसको लेकर सरकार ने गंगा निर्मलीकरण पर पर अरबों रुपए खर्च कर चुकी है लेकिन न ही गंगा निर्मल हो पाई है और न ही स्वच्छ. गंगा का पानी न ही नहाने की योग्य है और ना ही आचमन करने के. आस्था से जुड़ी गंगा आज सिकुड़ती जा रही है. भीषण गर्मी में जीवनदायिनी गंगा सिमटने लगी है. लगातार कम हो रहे पानी के कारण गंगा में जगह-जगह रेत के टीले उभर आए हैं. बीच-बीच में पानी की धारा दिख रही है. इस स्थिति को देख कर गंगा के तटवर्ती इलाके के लोग चिंतित हैं. क्षेत्रीय लोगों की मानें तो पिछले दो-तीन दशक में गंगा का जल स्तर इतना नीचे कभी नहीं गया था. जल स्तर कम होने की वजह से गंगा के तट से दो किलोमीटर तक के एरिया में हैंडपंपों ने जवाब दे दिया है. यदि यही स्थिति रही और बारिश कम हुई तो सिंचाई के लिए भी मुश्किल हो जाएगी और पानी के लिए लोग तरसेंगे.

बनारस में अगर बात की जाए तो गंगा में गिरने वाली सहायक नदी वरुणा का अस्तित्व खात्मे के कगार पर है. वरुणा का पानी सूख चुका है. ऐसे में सरकार कैसे निपटेगी यह तो वक्त ही बताएगा. अगर यही स्थिति बनी रही तो बनारस के लोग बूंद बूंद पानी के लिए भी तरसेंगे.

गंगा वैज्ञानिक विधि त्रिपाठी ने बताया कि गंगा की पहचान घाटों से है, पर इस पहचान को छोड़ दीजिए. आदमी की जान पर आ पड़ी है, इसमें आदमी की जान बचाना है कि पहचान, क्या हम पानी के बिना जिंदा रह पाएंगे या नहीं रह पाएंगे. गंगा इकलौती पानी का स्रोत है. अगर गंगा सूखी तो 45 करोड़ लोगों का जीवन दांव पर लगा है. हमें 45 करोड़ लोगों का जीवन बचाना है और आज की आवश्यकता है.

आज आदमी को नहाने के लिए, पीने के पानी के लिए, कृषि के लिए गंगा पर ही निर्भर है. अगर गंगा सूखती है तो लोग एक एक बूंद पानी के लिए तरसेंगे. पानी के कम होने का चार कारण हैं. उत्तराखंड में अलकनंदा, मंदाकिनी, भागीरथी के ऊपर जो बांध बना रखे हैं और इन बांधों के वजह से जो पानी रुक रहा है, और जैसे ही आगे बढ़ती है गंगा का पानी कम होता है तभी गंगा सिकुड़ती जा रही है.

गंगा सेवा समिति के सदस्य पप्पू तिवारी उर्फ बाबा ने बताया कि पहले गंगा में बांधने जितना लगता था जो आज इतनी बांध बना दिए गए जिससे गंगा की धारा रुक रही है. जिससे गंगा सूख रही है. भविष्य में आने वाला दिन ऐसा हो जाएगा की गंगा का दर्शन नहीं मिलेगा. 50 बरसों से ऐसा नहीं हुआ है, जिसमें गंगा घाट छोड़ कर के इतना नीचे गई हो. आज अगर इसे नहीं रोका गया तो लोग एक एक बूंद पानी के लिए तरसेंगे.


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