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नाम बदलने की सियासत का हिस्सा बन गए योगी आदित्यनाथ

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Nov 8 2018 1:19PM
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में जिलों और संस्थाओं के नाम बदलने की सियासत नई नहीं है. बसपा और सपा शासनकाल में जिलों के नामों की खूब अदला-बदली हुई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस होड़ में खुद को शामिल होने से रोक नहीं पाए.

योगी आदित्यनाथ ने अपनी पार्टी के धार्मिक और सांस्कृतिक एजेंडे को ध्यान में रखकर जिलों का नाम बदलना शुरू किया है. पहले फैजाबाद नगर पालिका परिषद को अयोध्या नगर निगम, फिर इलाहाबाद को प्रयागराज किया. फैजाबाद जिले का नाम बदलकर अयोध्या करना उनके इसी एजेंडे का हिस्सा लगता है. जानकार बताते हैं कि योगी सरकार अयोध्या पर आकर रुकने वाले नहीं हैं. बहुसंख्यक वर्ग से लखनऊ, मिर्जापुर, अलीगढ़, आजमगढ़ सहित कई जिलों के नाम बदलने की मांग हो रही है. भविष्य में और जिलों के नाम बदले जाएं तो अचरज नहीं होना चाहिए.

पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने दलित वोट बैंक के लिए जिलों और संस्थाओं के नामकरण को हथियार बनाया था तो अखिलेश यादव ने उस प्रभाव को खत्म करने के लिए फिर पुराने नाम कर डाले. मगर, मुख्यमंत्री योगी ने विरोधियों के फॉर्मूले को ही अपना हथियार बनाकर नामकरण की राजनीति को ताजा कर दिया है. उन्होंने इलाहाबाद जिले का नाम प्रयागराज करने के कुछ ही दिन बाद फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या कर दिया है. इसी के साथ राजधानी लखनऊ सहित कई अन्य जिलों के नाम बदलने की अटकलें भी तेज हो गई हैं.

काफी समय से लखनऊ का नाम लक्ष्मणपुरी करने की मांग हो रही है. यही नहीं जिस तरह से अभी हॉल में लखनऊ के इकाना स्टेडियम नाम बदलकर अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा गया. जिस पर समाजवादी पार्टी ने हमला भी बोला.

बसपा सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने दलित एजेंडे पर मजबूत पकड़ बनाने के लिए कई जिलों का गठन दलित महापुरुषों के नाम पर किया. उन्होंने कुछ जिलों के नाम भी बदले. कासगंज को कांशीराम नगर, हाथरस को महामाया नगर, कानपुर देहात को रमाबाई नगर, शामली को प्रबुद्ध नगर, अमेठी को छत्रपति शाहूजी महाराज नगर, हापुड़ को पंचशील नगर, अमरोहा को ज्योतिबाफुले नगर और संभल को भीमनगर नाम मायावती ने ही दिया था.

डॉ. अम्बेडकर के नाम पर फैजाबाद के कुछ हिस्से को अलग कर अंबेडकरनगर नाम से नया जिला भी बनाया. इसी कड़ी में मायावती ने केजीएमयू का नाम बदलकर छत्रपतिशाहू जी महराज चिकित्सा विश्वविद्यालय कर दिया था, लेकिन प्रदेश में सपा सरकार बनते ही अखिलेश ने एक बार फिर से पुराना नाम कर दिया.


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