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भागवत गीता के ज़रिये पुलिसकर्मियों में जागेगा आत्मविश्वास

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Feb 11 2019 10:42AM
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मुरादाबाद. उत्तर प्रदेश पुलिस अब अपने अधिकारियों और पुलिस कर्मियों को आत्मविश्वास और विपरीत परिस्थितियों में ड्यूटी को अंजाम देने के लिए भागवत गीता का सहारा लेने जा रही है. उत्तर प्रदेश पुलिस के सबसे बड़े प्रशिक्षण संस्थान में से एक मुरादाबाद स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर एकेडमी में अधिकारियों और ट्रेनिंग कर रहे कैडेट को भागवत गीता के जरिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक व्यवहारिक जीवन की दिक्कतों से निपटने के लिए भागवत गीता के श्लोक संजीवनी की तरह हैं.

उत्तर प्रदेश पुलिस अपनी कार्यशैली को लेकर कई बार सवालों के घेरे में रहती है. पुलिस की कार्यशैली और तनाव में ड्यूटी करने के कारण पुलिस को गाहे-बगाहे तमाम तरह के हालात से गुज़रना पड़ता है. पुलिस कर्मियों को एक संतुष्टि और संयमित जीवन जीने की प्रेरणा दिलाने के लिए अब पुलिस एकेडमी में भागवत गीता के श्लोकों और दृष्टांतों की मदद ली जा रही है, पुलिस एकेडमी में ट्रेनी डिप्टी एसपी और सब इंस्पेक्टर के बैच को आजकल भागवत गीता के जरिए अनुशासन और लोगों से संयमित व्यवहार करने का पाठ पढ़ाया जा रहा है.

भागवत गीता में कर्म और फल की इच्छा मत करो जैसे सद्वाक्यों के जरिए पुलिसकर्मियों को निस्वार्थ भाव से पीड़ित को न्याय दिलाने और बिना प्रलोभन के काम कर एक अच्छे अधिकारी बनने की नसीहत दी जा रही है. पुलिस कर्मियों को अध्यात्म का ज्ञान देकर बताया जा रहा है कि भौतिक सुख सुविधाओं से संतुष्टि होने की जगह इंसान को अपने कार्य से ज्यादा संतुष्टि और प्रसिद्धि मिलती है. सही और गलत की पहचान कर बिना किसी शंका के अपने विवेक से सही फैसला लेना और धैर्य से समस्या का समाधान कैसे किया जाए इसका भी भागवत गीता के इस लोगों से समझाया जा रहा है, पुलिस अधिकारियों के मुताबिक भागवत गीता, रामायण, महाभारत, पुराण , कुरान, बाइबिल जैसी धार्मिक ग्रंथों से भी कैडेट को जीवन जीने के बेहतरीन तरीको से अवगत कराना प्राथमिकता में है.

पिछले कुछ सालों में पुलिसकर्मियों में बढ़ते तनाव के कारण खुदकुशी के मामले भी बढ़े हैं, साथ ही लगातार ड्यूटी करने से डिप्रेशन की समस्या भी उभरी है, ऐसे में अधिकारियों की कोशिश है कि भागवत गीता जैसी धार्मिक पुस्तकों के जरिए पुलिसकर्मियों को अच्छे और बुरे का ज्ञान कराया जाए ताकि पुलिसकर्मी अच्छे इंसान बनकर अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्माण करें और अपने कर्तव्यों को बिना किसी प्रलोभन के सही तरीके से अंजाम दें.


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