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माल्या के बयान ने उठाया सियासी समंदर में तूफ़ान

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Sep 13 2018 7:49PM
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उत्कर्ष सिन्हा 

विजय माल्या ने वित्त मंत्री से अपनी मुलाकात का जिक्र क्या किया कि भारतीय राजनीति का तापमान अचानक ही उछल गया. बुधवार को जब लन्दन में विजय माल्या ने अरुण जेतली से अपनी मुलाकात का जिक्र किया था. तभी इस बात का अंदाजा लग गया था कि माल्या का यह बयान दिल्ली की सियासत में भूकम्प लायेगा. वही हुआ. पहले भाजपा नेता सामने आए तो उसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने वार किया.

भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद कह रहे हैं कि माल्या ने जो आरोप लगाये हैं, उसके पीछे कोई बड़ा षड़यंत्र है. रविशंकर प्रसाद यह भी पूछ रहे हैं कि आखिर माल्या का यह बयान राहुल की लन्दन यात्रा के बाद ही क्यों आया?

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा तो एक कदम और आगे बढ़ गए. पात्रा ने कहा कि किंगफिशर एयर लाईन्स में राहुल की कोई हिस्सेदारी तो नहीं है. कुछ चिट्ठियों का जिक्र करते हुए पात्रा ने आरोप लगाया कि किंगफिशर को मदद मिले इसलिए लोन स्ट्रक्चर भी बदल दिया गया.

भाजपा के हमले का जवाब देने राहुल गाँधी खुद ही मैदान में उतर गए. राहुल ने अरुण जेतली पर झूठ बोलने का इल्जाम लगाया. साथ ही यह भी पूछ लिया कि जेतली ने अपने से यह फैसला किया या ऊपर से ऐसा करने के लिए उन्हें आदेश मिला था. राहुल का निशाना कहाँ है. यह अंदाजा आप बखूबी लगा सकते हैं. राहुल ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए बतौर चश्मदीद अपने सांसद पीएल पुनिया को आगे किया.

राहुल गाँधी ने तीन बातें ऐसी कही हैं जिसका जवाब देना भाजपा के लिए जरूरी भी है और मुश्किल भी. पहला यह कि क्या सरकार सीसी टीवी की जांच करने को तैयार होगी? दूसरा सवाल यह कि अगर मुलाकात हुई थी तो जेतली ने जांच एजेंसियों और संसद में इसका जिक्र आखिर क्यूँ नहीं किया? और तीसरा सवाल माल्या के लिए जो अरेस्ट नोटिस था उसे इन्फर्मेशन नोटिस में किसने बदला?

एक तरफ राहुल का निशाना. तो दूसरी तरफ भाजपा के ही सांसद सुब्रमण्यम स्वामी भी कुछ ऐसे ही सवाल उठा रहे है. स्वामी का निशाना भी सीधा वित्त मंत्री पर ही है.

स्वामी और कांग्रेस करीब करीब एक जैसे ही सवाल उठा रहे हैं. यही सवाल अरुण जेतली सहित पूरी भाजपा के लिए चिंता का सबब है. कांग्रेस का हर सवाल इस वक्त नरेन्द्र मोदी के लिए बड़ी मुसीबत बनेगा यह भाजपा भी जानती है. और इसीलिए भाजपा नेताओं की टीम राहुल गाँधी पर लगातार हमले करने में जुटी है.

राफेल सौदे में गड़बड़ी और भगोड़े कारोबारियों की मदद के आरोपों के जरिये कांग्रेस नरेन्द्र मोदी की छवि पर निशाना साध रही है. सूट बूट वाली सरकार का जो नरेटीव राहुल ने करीब 3 साल पहले गढ़ा था. उसे ही वे आगे बढ़ा रहे हैं. और इसमें भी दो मत नहीं कि चुनावी समर करीब आने के साथ ही नरेन्द्र मोदी को इसकी गूंज कुछ ज्यादा तेज सुनाई देने लगी है.

(लेखक नेशनल वाइस में एसोसियेट एडीटर हैं )


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