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लाव लश्कर के साथ बीजेपी विधायक ने किया आत्मसमर्पण

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: May 13 2019 5:39PM
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हमीरपुर. यूपी के हमीरपुर जिले में सामूहिक हत्याकांड के दोषी बीजेपी विधायक अशोक चंदेल समेत पांच दोषियों ने आज कोर्ट में सरेंडर कर दिया है. 22 साल पहले हुए इस सामूहिक हत्याकांड के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चंदेल समेत सभी 10 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. आज सभी दोषियों को कोर्ट में सरेंडर करना था जिसके लिए जिला प्रशासन व पुलिस ने कड़े इंतजाम किये. चुनाव के कारण जिले में आचार सहिंता के साथ धारा 144 लागू थी. फिर भी सरेआम बीजेपी विधायक के हज़ारों समर्थकों ने इसका उल्लंघन किया. पुलिस के सामने ही सैकड़ों लोगों के साथ दोषी विधायक एकदम फिल्मी अंदाज में कोर्ट के अंदर पहुंचे और इसके बाद जेल जाते समय पुलिस और समर्थकों के बीच जमकर झड़प हुई. पुलिस को लाठियां तक भांजनी पडीं.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस डीके सिंह की खंडपीठ ने 19 अप्रैल को हमीरपुर में हुए पांच लोगों के सामूहिक हत्याकांड मामले में सदर विधायक अशोक चंदेल सहित 10 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी और पुलिस कस्टडी में लेने का आदेश दिया था, लेकिन अभी तक किसी भी दोषी को पुलिस गिरफ्तर नही कर पाई थी.

सूत्रों से मिले इनपुट के आधार पर दोषियों के सरेंडर करने को लेकर पुलिस ने मुख्यालय को छावनी में तब्दील कर दिया था. जिसके बाद आज हमीरपुर कोर्ट में हजारों समर्थकों के साथ नारेबाजी करते हुए बीजेपी विधायक अशोक चंदेल, रघुवीर सिंह, आशुतोष सिंह, भान सिंह और नसीम अहमद ने सरेंडर किया. वहीं तीन दोषियों प्रदीप सिंह, उत्तम सिंह, साहब सिंह को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.

जिले में आदर्श आचार संहिता और धारा 144 लागू होने के बाद भी पुलिस विधायक को गिरफ्तार नहीं कर पायी और विधायक सैकड़ों समर्थकों के साथ कोर्ट परिसर में दाखिल हो गये. इस दौरान विधायक के समर्थकों ने कोर्ट में जमकर हंगामा किया. कोर्ट में लगा मेटल डिटेक्टर तोड़ डाला. पुलिस के सामने समर्थकों ने अशोक चंदेल के नाम की नारेबाजी करते हुए जुलूस की तरह विधायक को जेल तक छोड़ने गये. हालांकि पुलिस ने धारा 144 के उल्लंघन के मामले की जाँच शुरू करते हुए कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है.

गौरतलब है कि 26 जनवरी 1997 को हमीरपुर में दिनदहाड़े राजीव शुक्ला के परिवार के पांच लोगों की हत्या कर दी गई थी, जबकि पांच घायल हुए थे. मृतकों में नौ साल का एक बच्चा भी शामिल था. इस मामले में निचली अदालत ने दोषियों को बरी कर दिया था. निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई थी. वहीं बरी करने वाले जज अश्विनी कुमार को जांच के बाद बर्खास्त कर दिया गया था. जिसके बाद पीड़ित परिवार के सदस्य और घटना के चश्मदीद राजीव शुक्ला ने मामले को हाईकोर्ट में दाखिल कर दिया था. 22 साल सुनवाई के बाद 19 अप्रैल को कोर्ट ने सभी 10 लोगों को दोषी करार दिया जिसमे झंडू सिंह की मौत हो चुकी है.


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