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शुक्रवार की सुबह बंद हो जायेंगे बाबा केदार के कपाट

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Nov 8 2018 4:59PM
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रोहित डिमरी

रुद्रप्रयाग. विश्व प्रसिद्ध तीर्थ धाम केदारनाथ में दीपावली पर्व धूमधाम से मनाया गया. बद्री-केदार मंदिर समिति, पुलिस, एसडीआरएफ, तीर्थ पुरोहित और श्रद्धालुओं ने रात भर नृत्य कर दीवाली का त्यौहार मनाया. केदारपुरी जहां मोमबत्ती और दियों की रोशनी में जगमगाई, वहीं स्थानीय आलू, मूली, राई की पकोड़ियों और चौलाई के व्यजंन परोसे गये. जबकि जवानों की भजन-कीर्तन संध्या का श्रद्धालुओं ने जमकर लुत्फ उठाया.

बाबा केदार के धाम में कड़ाके की ठण्ड के बीच तैनात पुलिस, एसडीआरएफ और मंदिर समिति के अधिकारी-कर्मचारियों ने दीपावली का त्यौहार मनाया. पुलिस टीम द्वारा स्थापित ब्रह्म वाटिका को भी फूल मालाओं और बिजली की लड़ियों से जगमगाया गया. रात्रि को पूरी केदारपुरी का दृश्य आम दिनों की अपेक्षा बिलकुल अलग अंदाज में था. चारों ओर दिये और मोमबत्तियों की रोशनी से पूरी केदारपुरी अच्छादित की गई. वहीं पकवान भी केदारपुरी में उत्पादित सब्जियों से बनाये गये. पुलिस द्वारा केदारनाथ धाम में आलू, मूली और राई उगाई गई है, और इसी से पकौड़ियां, सब्जी बनाई गई, जबकि चैलाई के लड्डू भी परोसे गये. रात्रि के समय सभी मिलकर भजन कीर्तन के साथ नृत्य करते रहे, जिससे केदारपुरी का माहौल भक्तिमय बना रहा.

दूसरी ओर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में अग्रणी भगवान केदारनाथ के कपाट भैयादूज के पर्व पर शुक्रवार को प्रातः सवा आठ बजे बंद कर दिये जाएंगे. भगवान केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली धाम से प्रस्थान कर विभिन्न यात्रा पड़ावों पर श्रद्धालुओं को आशीष देते हुए प्रथम रात्रि प्रवास के लिये रामपुर पहुंचेगी. कपाट बंद को लेकर मंदिर समिति के अधिकारी व पुलिस प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर दी हैं. यहां तक की तीर्थ पुरोहित समाज और स्थानीय व्यापारियों ने भी अपना सामान समेट लिया है.

प्रातः सवा आठ बजे भगवान केदारनाथ के कपाट शीतकाल के लिये बंद किये जाएंगे. इससे पूर्व प्रधान पुजारियों, विद्वान आचार्यों, वेदपाठियों व हक-हकूकधारियों द्वारा भगवान केदारनाथ की विभिन्न पूजाएं संपंन कर भगवान केदारनाथ के स्वयंभू लिंग को ब्रम्हकमल, भष्म, पुष्प-अक्षत्र सहित विभिन्न पूजार्थ सामाग्रियों से समाधि दी जाएगी. इसके बाद भगवान केदारनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली केदारपुरी, लिनचैली, जंगलचटटी, गौरीकुंड, सोनप्रयाग सहित विभिन्न यात्रा पड़ावों पर श्रद्धालुओं को आशीष देते हुए प्रथम रात्रि प्रवास के लिये रामपुर पहुंचेगी. इसके बाद शनिवार को डोली द्वितीय रात्रि प्रवास के लिये विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी पहुंचेगी. जहां पर अखण्ड जागरण का आयोजन किया जायेगा. रविवार को डोली अपने शीतकालीन गददीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंचेगी, जिसके बाद बाबा केदार की मूर्ति को पूजा स्थल पर विराजमान किया जायेगा और इसके बाद भगवान केदारनाथ की शीतकाल की पूजा यहीं पर होगी.


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