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शोध छात्र से आतंकी बने मन्नान की एएमयू में हुई नमाज़-ए-जनाज़ा की कोशिश

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Oct 12 2018 9:04AM
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अलीगढ़. एएमयू के शोध छात्र से आतंकी बने मन्नान वानी को ढेर करने की खबर आते ही कुछ कश्मीरी छात्रों ने न सिर्फ उसे 'भाई' बताया बल्कि एएमयू कैंपस में आतंकी के जनाजे की नमाज तक पढ़ने की कोशिश की. प्रॉक्टोरियल टीम ने जब उन्हें रोका तो मारपीट भी की गई. कवरेज कर रहे एक मीडिया कर्मी को पीटा और दो मोबाइल फोन भी छीन लिए. एएमयू प्रशासन ने तीन कश्मीरी छात्रों को निलंबित कर दिया है. बाकी की पहचान की जा रही है.

एएमयू के भूगर्भ विज्ञान विभाग का शोध छात्र रहा मन्नान वानी जनवरी में अचानक आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़कर भाग गया था. पता तब लगा, जब रायफल लिए हुए उसकी तस्वीर वायरल हुई. फिर, एएमयू ने उसे निलंबित कर दिया. जम्मू-कश्मीर ने सेना के वानी समेत दो आतंकियों को ठिकाने लगाने की खबर आई तो एएमयू के करीब डेढ़ सौ कश्मीरी छात्र केनेडी हॉल के लॉन में मातम मनाने जुटे.

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र मन्नान बानी ने गलत रास्ता चुना था जिसका परिणाम उसे भुगतना पड़ा. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले पर साफ़ कर दिया है कि किसी भी कीमत पर देश विरोधी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.

जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में मारे गए दो आतंकियों में एक मन्नान वानी भी था, जो एएमयू में रिसर्च स्कॉलर था. वह पढ़ाई छोड़कर दो जनवरी को चला गया था. पूर्व छात्र संघ के पदाधिकारी का कहना है कि मन्नान होनहार छात्र था, लेकिन उसने गलत रास्ता चुना, जिसका उसको परिणाम भुगतना पड़ा. मन्नान चाहता तो शिक्षा पूरी कर देश, कौम और कश्मीर के साथ नौजवानों की बेहतर सेवा कर सकता था. एएमयू छात्रों के लिए पहले देश है. आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता.

इस मामले पर अलीगढ़ के भाजपा सांसद सतीश गौतम ने कश्मीर के छात्रों के सभा करने पर वीसी का फेल्योर माना, अगर इनको नमाज पढ़नी हो कश्मीर में जा कर पढ़ें. वह मानव संसाधन मंत्री व वीसी को पत्र लिखेंगे. युवा मोर्चा अध्यक्ष ने नमाज पढ़ने की कोशिश पर कहा इसकी जांच होनी चाहिए. अभी कई मन्नान वानी निकलेंगे.

मन्नान वानी अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी में जियॉलजी से पीएचडी का छात्र था. पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर एके-47 के साथ उसकी एक तस्वीर साझा हुई थी. जिसके कैप्शन में उसके 'ऐटिवेशन डेट' के तौर पर 5 जनवरी लिखा था. जिसके बाद से उसके हिज्बुल मुजाहिदीन में शामिल होने का अंदेशा जताया जा रहा था. मन्नान वानी तीन जनवरी से लापता था. मन्नान की तस्वीर सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मन्नान को निलंबित कर दिया था. मन्नान के मारे जाने पर अलगाववादी नेता मीरवायज उमर फारूक ने ट्वीट में लिखा, ''अफसोस! मन्नान वानी और उसके सहयोगियों की शहादत की दुखद खबर सुनी. गहराई से पीड़ा है कि हमने एक उभरते हुए बुद्धिजीवी और लेखक को खो दिया.


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