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12 देशों के वैज्ञानिकों से दो दिन गुलज़ार रहेगा लखनऊ

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Jan 11 2019 6:33PM
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 25वीं अंतर्राष्ट्रीय आईएससीबी कांफ्रेंस का आयोजन किया जाएगा. इस कांफ्रेंस में 12 देशों के वैज्ञानिक शामिल होंगे. 12 और 13 जनवरी को होटल गोल्डन टयूलिप में होने जा रही इस कांफ्रेंस में लगभग 400 वैज्ञानिक अपने शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे. इस मौके पर डॉ. एनसी देसाई को लाइफटाइम अचीवमेंट एवार्ड से सम्मानित किया जाएगा.

आज होटल गोल्डन टयूलिप में इंडियन सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्स एंड बायोलॉजिस्ट (ISCB) ने संवाददाताओं को इस कांफ्रेंस के बारे में विस्तार से जानकारी दी. संस्था के सचिव डॉ. पी.एम.एस. चौहान ने बताया कि कल से लखनऊ में 12 देशों के वैज्ञानिक इकट्ठा होकर आज की दवाओं और उनके प्रभाव की दिशा में हो रहे अनुसंधानों के बारे चर्चा करेंगे.

संस्था के अध्यक्ष एवम महात्मा गांधी विद्यापीठ के कुलपति प्रोफेसर अनामिका शाह ने बताया कि यह कॉंफ्रेंस युवा शोधार्थियों के लिए सम्भावना के नए द्वार खोलेगी. इस अवसर पर जीवीके बायो साइंसेज हैदराबाद के प्रेसीडेंट डॉ. सुधीर कुमार सिंह एवम राजस्थान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर महेश शर्मा ने कांफ्रेंस के बारे में विस्तार से जानकारी दी.

इंडियन सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्स एंड बायोलॉजिस्ट (ISCB) की स्थापना 25 साल पहले भारत में हुई थी. जिसमें अब लगभग 2500 सदस्य शामिल हैं.  ISCB ने लखनऊ, आगरा, दिल्ली, पिलानी, चेन्नई, उडुपी, गुवाहाटी, औरंगाबाद, नागपुर, राजकोट, सूरत, जयपुर, उदयपुर जैसे स्थानों पर उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक अपने सम्मेलन आयोजित किए हैं. जिनमें 25 हज़ार से अधिक प्रतिनिधि शामिल हो चुके हैं.

ISCB पहली ऐसी साइंस सोसायटी है जो केमेस्ट्री और बायोलोजी को साथ लेकर चलती है. इस कांफ्रेस में एक तरफ टीबी और मलेरिया जैसी बीमारियों के निदान ढूँढने पर गंभीरता से चर्चा होगी तो साथ ही फ्लो केमेस्ट्री पर भी चर्चा की जायेगी.

डॉ. पी.एम.एस. चौहान ने बताया कि फ्लो केमेस्ट्री में चीन भारत से करीब 20 साल आगे है. यह ऐसी टेक्नालाजी है जिसमें प्रोडक्शन बढ़ता है जबकि वेस्टेज में कमी आती है. उन्होंने कहा कि इस कांफ्रेंस के ज़रिये हम सरकार से मांग करेंगे कि वह भारतीय युवा वैज्ञानिकों को फ्लो केमेस्ट्री के गुर सीखने के लिए उन देशों में पढ़ने के लिए भेजें जहाँ पर यह तकनीक आम हो चुकी है.

ISCB इस मौके पर उत्कृष्ट योगदान देने वाले वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को सम्मानित भी करेगा.

डॉ. एनसी देसाई, प्रोफेसर और प्रमुख, महाराजा कृष्ण कुमार सिंह जी विश्वविद्यालय, भावनगर, प्रोफेसर जयपाल मित्तल, डॉ. विजयमोहन के पिल्लई, पूर्व निदेशक, सीएसआईआर-सीईसीआरआई, कराईकुडी, तमिलनाडु, को लाइफ टाइम अचीवमेन्ट पुरस्कार 2019 से सम्मानित किया जाएगा.

रासायनिक विज्ञान के क्षेत्र में डॉ. सतपाल सिंह बडसरा, सहायक प्रोफेसर, राजस्थान को युवा वैज्ञानिक-2019 पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. जैविक विज्ञान के क्षेत्र में डॉ. तिमिर त्रिपाठी, नॉर्थ-ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी, शिलांग को युवा वैज्ञानिक-2019 का पुरस्कार मिलेगा.

डॉ. नीलिमा गुप्ता, एसोसिएट प्रोफेसर, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर, डॉ. नम्रता रस्तोगी, सीनियर साइंटिस्ट मेडिसिनल एंड प्रोसेस केमिस्ट्री डिवीजन CSIR-CDRI, लखनऊ का भी इस कांफ्रेंस में सम्मान होगा. इनके अलावा जैविक विज्ञान में प्रो. रचना सदाना, एसोसिएट, जीव विज्ञान 1 मुख्य सेंट यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन-डाउनटाउन ह्यूस्टन, यूएसए के प्रोफेसर को बेस्ट टीचर अवार्ड दिया जाएगा.

रासायनिक विज्ञान में प्रो. पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी, निदेशक फार्मेसी, रामेश्वरम प्रौद्योगिकी और प्रबंधन संस्थान, लखनऊ को बेस्ट टीचर अवार्ड दिया जाएगा.

डॉ. अमित जोहरापुरकर, जिदस कैडिला रिसर्च सेंटर, अहमदाबाद में फार्माकोलॉजी और विष विज्ञान विभाग में महाप्रबंधक को औद्योगिक SCIENTIST-2019 के लिए पुरस्कार मिलेगा.


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