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काशी में धूम से मना भैयादूज

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Nov 9 2018 3:10PM
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वाराणसी. भैयादूज यानी भाई बहन के प्यार के पर्व और गोवर्धन पूजा के बाद आज बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर और आरती उतारकर उनकी सलामती और दीर्घायु की मंगल कामना की, लेकिन भाइयों के माथे पर तिलक और आरती से पहले आज के दिन बहनें अपने भाइयों को गालियाँ भी देती हैं और बाद में अपने भाइयों को दी गई गाली के लिए क्षमा याचना के लिए खुद की जीभ पर कांटे चुभा कर क्षमा याचना भी करती हैं.

यह सब होता है काशी में गली मोहल्ले में होने वाली पूजा के दौरान.  भैयादूज और गोवर्धन पूजा आज विधि विधान से निभाया गया. गली-मुहल्लों और घरों में गोबर से बनी आकृतियों और पहाड़ पर आटा, चावल व पुष्प आदि से सजावट कर महिलाओं ने गिरिराज महाराज की पूजा- अर्चना की एवं परिक्रमा ली. आज के दिन सुबह सवेरे व्रती महिलाओं और बहनों ने घर के आंगन को गोबर के लेप से शुद्ध करने के साथ गोबर से किनारों को घेर गोबर से गोधन और गोधाइन और दो द्वारपाल भी बनाये. जिन्हें स्नान आदि कराकर पीले वस्त्र से सुशोभित किया गया.

षडोशोपचार पूजन-अर्चन के बाद गोधन और गोधाइन, गणेश जी और तुलसी जी सहित सहित पांच कथाएं सुनी गईं. कथा सुनने के साथ ही पांच सुहागिनों ने मूसल में सिन्दूर लगाकर गोधन और गोधाइन के बीच ईट, सुपाड़ी और चने की कुटाई की. इसके बाद बहनों ने भाइयों की लम्बी आयु के लिए भाइयों का नाम लेकर भूम्मभटकईया के कांटे को अपनी जीह्वा में स्पर्श कराकर उसे फेंक दिया. साथ ही हल्दी मिश्रित रूई की माला बनाकर पांच बार हाथ की अगुंलियों में लपेटा और उसके दोनों सिरों को आपस में जोड़कर उसे गोधन कूटाई में दे दिया और अंत में  भाइयों को बहनों ने टीका लगा चना खिलाकर उनकी दीर्घायु की कामना की.


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