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माँ ब्रह्मचारिणी के पूजन से रुके हुए काम भी बन जाते हैं

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Apr 7 2019 12:20PM
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वाराणसी. मां दुर्गा की आराधना का महापर्व शुरू हो चुका है. देवी के नौ रूपों की पूजा इन नौ दिनों में की जाती है. पूरे देश की तरह ही वाराणसी के नौदुर्गा मंदिरों में भी भक्तों का तांता लगा हुआ है. मान्यता है कि नवरात्र में दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी के दर्शन का विधान है. वाराणसी में मां का मंदिर ब्रम्हा घाट पर स्थित है. नवरात्र के दूसरे दिन यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है.

भगवती दुर्गा की नौ शक्तियों का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है. ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएं हाथ में कमण्डल रहता है. देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप ज्योर्तिमय है. ये मां दुर्गा की नौ शक्तियों में से दूसरी शक्ति हैं. तपश्चारिणी, अपर्णा और उमा इनके अन्य नाम हैं.

इनकी पूजा करने से सभी काम पूरे होते हैं, रुकावटें दूर हो जाती हैं और विजय की प्राप्ति होती है. इसके अलावा हर तरह की परेशानियां भी खत्म होती हैं. देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है. जो देवी के इस रूप की आराधना करता है उसे साक्षात पर ब्रह्म की प्राप्ति होती है.

दुर्गा सप्तशती में स्वयं भगवती ने इस समय शक्ति-पूजा को महापूजा बताया है. मंदिर के महंत ने बताया कि माँ ब्रह्मचारिणी को ब्रहमा की बेटी कहा जाता है, क्योंकि ब्रहमा के तेज से ही उनकी उत्पत्ति हुई है. माँ के इस स्वरूप की आराधना करने पर शक्ति, त्याग, सदाचार, संयम और वैराग्य में वृद्धि होती है. माँ को लाल फूल का चढ़ावा बहुत पसंद है. माँ को वैसे खीर और मलाई का यदि भोग लगाया जाए तो माँ प्रसन्न होती हैं, क्योंकि माँ को दूध की चीजें पसन्द हैं.

साथ ही महंत ने बताया कि माँ ब्रह्मचारिणी को नारियल अति प्रिय है. अगर माँ को नारियल की बलि दी जाये तो सभी भक्तों की सारी मनोकामनाओं को माँ पूर्ण करती हैं. माँ के तेज की लीला अपरम्पार है. यहाँ आकर जो भी मुराद माँगी जाती है, वो ज़रूर पूरी होती है.


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