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चार साल आपस में लड़े, अब साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे!

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Feb 18 2019 4:28PM
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राजेन्द्र कुमार

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और शिवसेना का ढाई दशक से ज़्यादा पुराना गठबंधन नहीं टूटेगा. बीते करीब चार सालों से दोनों दलों के बीच चल रही लड़ाई को खत्म करने पर सहमति हो गई. अब दोनों ही दलों ने एक दूसरे के खिलाफ खिंची तलवारें म्यान में रखते हुए आगामी लोकसभा चुनाव एक साथ मिलकर लड़ेंगे. यही नहीं दोनों दलों में तय हुआ है कि शिवसेना राज्य में बड़े भाई की भूमिका में रहेगा. बीजेपी और शिवसेना लोकसभा तथा विधानसभा के चुनावों में आधी-आधी सीटों पर चुनाव लड़ेगी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र में इस फार्मूले के तहत चुनाव लड़ने पर सहमत हो गए हैं. जल्दी ही अमित शाह और उद्धव ठाकरे मिलकर इस फैसले का ऐलान करेंगे.

गौरततलब है कि शिवसेना और बीजेपी का गठबंधन टूटने की कगार पर खड़ा था. बीजेपी के दिवंगत नेता प्रमोद महाजन की राजनीतिक सूझ-बूझ से उपजा शिवसेना और बीजेपी गठबंधन बीते चार सालों से एक दूसरे के खिलाफ काम कर रहा था. जिसके कारण दोनों ही दलों को महाराष्ट्र में नुकसान हो रहा था. फिर भी बीजेपी और शिवसेना अपने विवाद को खत्म करने को तैयार नहीं थे. ऐसे में जब मायावती और अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में चुनावी तालमेल किया, और इसी दरमियान प्रियंका गांधी ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी के रणनीतिकारों को शिवसेना से गठबंधन टूटने से होने वाले नुकसान पर ध्यान गया. तो पाया गया कि महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी चुनावी गठबंधन कर चुनाव लड़ेंगे. जिससे यदि शिवसेना और बीजेपी अलग-अलग चुनाव लड़ी तो दोनों को ही नुकसान होगा. यही नहीं वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव बीजेपी को मिली 23 और शिवसेना को मिली 18 सीटों पर जीत हासिल करना मुश्किल होगा. ऐसे आंकलन के आधार पर तय हुआ कि शिवसेना की नाराजगी खत्म की जाए. ताकि महाराष्ट्र में बीजेपी को चुनावी नुकसान न हो.

अमित शाह और उद्धव ठाकरे के बीच छत्तीस के रिश्ते को देखते हुए यह कार्य आसान नहीं था. इसके कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को उद्धव ठाकरे को मनाने की जिम्मेदारी सौंपी. इसी क्रम में शिवसेना के संस्थापक सुप्रीमो दिवंगत बाल ठाकरे की स्मृति में बनने वाले स्मारक के लिए एक सौ करोड़ रुपए के फंड की मंजूरी दी गई. इसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात की. जिसमें फड़नवीस ने पीएम मोदी के संदेश से उद्धव को अवगत कराया, और सीटों के तालमेल को लेकर बातचीत की. इस बैठक के नतीजों के बारे में फड़नवीस ने पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को जानकारी दी. इसी के बाद यह तय हुआ कि शिवसेना और बीजेपी लोकसभा और विधानसभा की आधी-आधी सीटों पर चुनाव लड़ेगी. बीजेपी 25 और शिवसेना 23 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी. बीजेपी अपने सहयोगी दलों को दो सीटें देगी. जबकि विधानसभा की 288 सीटों में से बीजेपी 144 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. इनमें से सात आठ सीटें वह अपने सहयोगी दलों को देगी. जबकि शिवसेना 137 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. 

शिवसेना और बीजेपी के बीच सीटों के तालमेल को लेकर हुई इस सहमति के बाद भी अभी सीएम पद को लेकर निर्णय नहीं हो सका है. इसी मसले को लेकर बीजेपी के साथ शिवसेना की तल्खी बढ़ी थी. अब विधानसभा चुनाव के लिए शिवसेना की वही शर्त है, जो 2014 में थी. एक नई शर्त यह जुड़ी है कि यदि गठबंधन में चुनाव लड़ना है तो महाराष्ट्र विधानसभा भंग की जाय और लोकसभा के साथ ही उसके चुनाव हों जिससे लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा के मुकरने की कोई गुंजाइश ही न रहे. कहा जा रहा है कि अमित शाह और उद्धव ठाकरे के साथ होने वाले बैठक में इस मुददे को सुलझा लिया जाएगा. फिलहाल जिस तरह से एक झटके में बीजेपी और शिवसेना की नाराजगी खत्म होने का संदेश आया है, उसे लेकर फिर यही कहा जा रहा है कि राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन किसी का नहीं होता. अपने-अपने स्वार्थ के लिए चुनावों के पहले और चुनावों के बाद विरोधियों से हाथ मिलाए जाते रहे हैं और मिलाए जाते रहेंगे.  

(लेखक नेशनल वाइस में एसोसियेट एडीटर हैं.)


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