आप यहां हैं : होम» धर्म-कर्म

गणपति पहुँच गये अपने ननिहाल

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Sep 15 2018 2:49PM
ganpati_2018915144913.jpg

हिमांशु चौहान

हरिद्वार. देश भर में गणपति उत्सव की धूम है. गणपति पहुंच गये हैं अपने नाना के घर. गणपति अब कनखल में अपने नाना राजा दक्ष की नगरी में विराजेंगे, और अपने भक्तों को सुख-सृमृद्धि और शांति का आशीर्वाद देंगे. कनखल और हरिद्वार में कई जगहों पर गणपति स्थापित किये गये हैं, लेकिन गणपति की सबसे अनोखी छटा उनके नाना के घर ही है. गणपति महोत्सव को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह है. बड़े पंडालों के साथ गणपति को अब घरों में भी स्थापित किया जाने लगा है.

लोग इस दिन का पूरे साल इंतज़ार करते हैं. भक्ति भाव और श्रद्धा के साथ उनकी पूजा अर्चना करते हैं. कनखल में विराजने के बाद भव्य शोभायात्रा के साथ गणपति को गंगा में विसर्जित किया जाएगा. हरिद्वार में आने वाले यात्री भी भगवान शिव की ससुराल और उनके पुत्र गणपति के ननिहाल में आकर उनके दर्शन कर रहे हैं. आपको बता दें कि भाद्र पक्ष के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भगवान गणेश का जन्म हुआ था. कनखल उनका ननिहाल है. चतुर्थी से लेकर चतुर्दशी तक भगवान यहाँ पर साक्षात विराजमान रहते हैं, और 10 दिन बाद उनका विसर्जन कर दिया जाता है.

श्रावण का महीना समाप्त होते ही भगवान शंकर तो अपनी ससुराल कनखल से विदा होकर चले गये हैं कैलाश पर्वत की ओर मगर अब उनके पुत्र गणपति पहुंच गये हैं अपने नाना के घर कनखल. भले ही देश भर में गणपति की धूम मची हुई हो मगर उनके नाना के घर कनखल में गणपति की बात सबसे निराली है. गणपति की स्थापना वैसे तो हरिद्वार और कनखल मे कई स्थानों पर की गई पर सबसे ज्यादा रूप आया है उनके नाना के घर कनखल में. दक्ष मंदिर में स्थापित किये गये हैं अष्ट विनायक गणेश जी. गणपति महोत्सव को लेकर लोगो में जबरदस्त उत्साह है.

कनखल में विराजने के बाद भव्य शोभायात्रा के साथ गणपति को गंगा में विसर्जित किया जाएगा. हरिद्वार में आने वाले यात्री भी भगवान शिव की ससुराल और उनके पुत्र गणपति के ननिहाल में आकर उनके दर्शन कर रहे हैं और यहां पर आने वाले यात्रियों का कहना है कि यहां पर मांगी हुई मुरादें पूरी होती हैं और यहां पर गणपति की धूम चारों ओर दिखाई दे रही है, और वह यहां पर गणपति के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं. अपनी मुरादें और मनोकामनाएं मांग रहे हैं.

गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा और प्रतिमा की स्थापना की जाती है. इस समय को बेहद शुभ समय माना गया है. भाद्र पक्ष की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भगवान गणेश का जन्म हुआ था और कनखल उनकी ननिहाल है. चतुर्थी से लेकर चतुर्दशी तक भगवान यहाँ पर साक्षात विराजमान रहते हैं, और 10 दिन बाद उनका विसर्जन कर दिया जाता है. जो भी गणेश सच्चे मन से कोई भी मुराद मांगता है उसकी सब मुरादें पूरी हो जाती हैं.


देश-दुनिया की अन्य खबरों और लगातार अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें। आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं।