आप यहां हैं : होम» धर्म-कर्म

श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है गंगा दशहरा

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Jun 12 2019 1:51PM
ganga_2019612135156.png

वाराणसी. आज गंगा दशहरा मनाया जा रहा है. इस दिन लोग पवित्र गंगा नदी में स्नान करते हैं और दान-पुण्य करते हैं. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बाद पूजा-पाठ और व्रत रखते हैं. गंगा दशहरा के मौके पर हजारों श्रद्धालु हरिद्वार, वाराणसी, फर्रुखाबाद समेत कानपुर में गंगा जी में डुबकी लगा रहे हैं.

ज्येष्ठ शुक्ल दशमी गंगा दशहरा के पावन पर्व पर पतित पावनी में आस्था की डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा है. अस्सी से राजघाट के बीच गंगा के तटों पर तिल रखने की जगह भी नहीं है. गंगा स्नान के बाद गरीबों को वस्त्र, अन्न का दान करने की होड़ मची है. मान्यता है कि भगीरथ की कठिन तपस्या के बाद कभी इसी तिथि पर गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थी.

गंगा अवतरण दिवस पर गंगा का वेद की ऋचाओं से कहीं दुग्धाभिषेक तो कहीं महाआरती कर उत्सव मनाया गया. गंगा दशहरा पर काशी में  ढाई लाख से अधिक श्रद्धालुओं के डुबकी लगाने का अनुमान है. भोर में ही घंटे -घड़ियाल की गूंज के साथ स्नान शुरू हो गया. घाट की सीढ़ियों पर कहीं महिलाएं दीपदान कर रही थीं तो कहीं समूहों में हल्दी-चंदन की अल्पनाएं बनाकर मंगल गीत गाए जा रहे थे. गंगा की लहरों पर भी दीये प्रज्ज्वलित कर उनके प्रति आस्था निवेदित की जा रही थी. अस्सी घाट, तुलसी घाट, गंगा महल घाट, हनुमान घाट, केदार घाट, राजा घाट, मान सरोवर घाट, दशाश्वमेध घाट, अहिल्याबाई घाट, शीतला घाट, मान मंदिर घाट, पंचगंगा घाट, दुर्गा घाट, गायघाट, राजघाट पर बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं ने गंगा दशहरा पर स्नान किया. गंगा स्नान के बाद बाबा विश्वनाथ जी के दर्शन के लिए भी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं.

पर्यावरणविद स्वामी आचार्य जितेन्द्रानंद सरस्वती का कहना है कि गंगा सफाई का प्रश्न गंगा की अविरलता से जुड़ा हुआ है. जल की पर्याप्त मात्रा होने पर गंगा हमें साफ दिखती है. उन्होंने कहा कि कुंभ का स्नान पर्याप्त जल में कराया लेकिन पवित्र जल में नहीं कराया. जहां तक गंगा दशहरा मई-जून में 98 फ़ीसदी पानी हरिद्वार से दिल्ली की प्यास बुझाने पश्चिमी यूपी में सिंचाई उपयोग में चला जाता है. नीचे जल आता ही नहीं है. ऐसे में सीवर का पानी गंगा में गिर रहे हैं. गंगा का मूल जल गंगा में है.

उन्होंने कहा कि एसटीपी की टेक्नोलॉजी बिग प्रोजेक्ट बिग मनी और भी कमीशन के खेल में गंगा ही नहीं भारत में नदियों के किनारे बनने वाले एसटीपी पूरी दुनिया को धोखा दे रही हैं. गंगा दशहरे के पावन पर्व पर मैं यही कहूंगा कि हमारी नियत अगर साफ़ हो जाएगी तो गंगा खुद-ब-खुद निर्मल व अविरल हो जाएगी. वरना सदियों के लिए हम इस दंश को झेलेंगे, और जल के लिए अगला विश्वयुद्ध होना तय है.

वहीं स्नान करने आये श्रद्धालुओं का मानना है कि आज के दिन राजा भागीरथ ने माँ गंगा को हिमालय पर्वत से धरती पर लेकर आये थे. इसलिये गंगा दशहरा का महत्व और भी बढ़ जाता है. गंगा में स्नान करने से मनुष्यों को पापों से मुक्ति मिलती है. जहाँ तक गंगा निर्मलीकरण की बात की जाय तो गंगा अविरल है, पहले की अपेक्षा गंगा काफी साफ हुई है. गंगा में थोड़ी बहुत जो गंदगी है या सीवर का पानी गंगा में गिरता है उसके जिम्मेदार हम खुद हैं.

राजेंद्र दुबे (पंडा) का कहना है आज के दिन गंगा अवतरित हुई थी इसको लेकर आज स्नान का खासा महत्व है. लाखों श्रद्धालु आज गंगा में स्नान कर दान पुण्य करते हैं. ऐसा मानना है कि आज के दिन जो भी गंगा में स्नान करता है वह 10 पापों से मुक्ति मिल जाता है. गंगा निर्मलीकरण के सवाल पर राजेंद्र दुबे ने कहा कि गंगा पहले से तो काफी साफ हुई है. गंगा में जो गंदगी गिर रही है उसके जिम्मेवार हम खुद हैं.

हरिद्वार में भी गंगा स्नान करने के लिए लोग लगातार पहुंच रहे हैं. इससे सिर्फ हरिद्वार में ही नहीं पूरे उत्तराखंड में भीषण जाम की स्थिति बन गई है. वहीं कानपुर में भी श्रद्धालु गंगा जी में डुबकी लगाने के लिए पहुंच रहे हैं. हिंदू कैलेंडर के मुताबिक हर साल ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है. वहीं, अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक गंगा दशहरा मई या जून में आता है.

गंगा दशहरा के मौके पर हजारों श्रद्धालु कानपुर में गंगा जी में डुबकी लगाने के बाद नदी किनारे हवन और तप करते हैं. हिंदुओं में गंगा दशहरा का बहुत महत्व होता है. इस दिन पूजा-पाठ, हवन और मुंडन जैसे शुभ काम किए जाते हैं. इस दिन लोग गंगा नदी के किनारे जाकर तप, हवन, दान और जप करते हैं. मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन जिस भी चीज़ का दान करें उसकी संख्या 10 होनी चाहिए. साथ ही हिंदु पुराणों के अनुसार गंगा दशहरा के दिन गंगा का जन्म हुआ था, इसलिए गंगा नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है. हिंदु मान्यता के अनुसार गंगा दशहरा के दिन गंगा का अतवार हुआ था. यानी इसी दिन गंगा नदी का धरती पर जन्म हुआ था.

गंगा दशहरा से एक प्रचलित कथा के अनुसार ऋषि भागीरथ को अपने पूर्वजों की अस्थियों के विसर्जन के लिए बहते हुए निर्मल जल की आवश्यकता थी. इसके लिए उन्होंने मां गंगा की कठोर तपस्या की, जिससे मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं. लेकिन गंगा के तेज बहाव के कारण वह अस्थियां विसर्जित नहीं कर पाए. तब मां गंगा ने कहा कि यदि भगवान शिव उन्हें अपनी जटाओं में समा कर पृथ्वी पर मेरी धारा प्रवाह कर दें, तो यह संभव हो सकता है. ऋषि भागीरथ ने अब भगवान शिव की तपस्या कर गंगा की धारा जटाओं में समाहित करने का आग्रह किया. इसके बाद शिव ने गंगा की एक छोटी सी धारा को पृथ्वी की ओर प्रवाहित कर दिया. तब जाकर भागीरत अपने पूर्वजों की अस्थियों को विसर्जित कर पाए और इस तरह गंगा का धरती पर अवतार हुआ.


देश-दुनिया की अन्य खबरों और लगातार अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें। आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं।