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डाक्टरों की कमी के मद्देनज़र उन्हें 70 साल पर रिटायर करेगी सरकार

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Dec 16 2018 3:19PM
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प्रियम पाठक

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में जनता को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने और डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए डाक्टरों का सेवा काल 60 साल से बढ़ा कर 70 साल करने की तैयारी करने जा रही है. वहीं इस बात से नाखुश पीएमएस संघ इसका विरोध कर रहा है. पीएमएस के सदस्यों का कहना है कि अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार को नए डाक्टरों की भर्ती करनी पड़ेगी. डॉक्टरों के रिटायरमेंट की उम्र बढ़ा देने से इसका समाधान नहीं होने वाला है. पीएमएस संघ के उपाध्यक्ष डॉक्टर आशुतोष दुबे का कहना है कि आज कोई डॉक्टर प्रांतीय सेवा में नहीं आना चाहता है. क्योंकि किसी भी मरीज की मौत होने पर हमेशा डॉक्टर को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है. इन्हीं वजहों से अब कोई डाक्टर सरकारी संस्थानों में नहीं आना चाहते हैं.

प्रदेश में सरकार हमेशा ही बेहतर स्वास्थ सेवा का दम भरती है. पर हकीकत हर रोज आने वाली तस्वीरें खुद सच्चाई बयान कर देती हैं. डब्लूएचओ के मानकों के मुताबिक एक हजार की जनसंख्या पर एक डाक्टर की ज़रुरत होती है. पर प्रदेश के अंदर अभी महज 700 हजार ही डाक्टर है. जिस वजह से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों की काफी कमी है. सरकार के मुताबिक इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार की तरफ हर मुमकिन प्रयास किए जा रहे हैं. इसी के कारण अब प्रदेश सरकार डाक्टरों की सेवा आयु 60 साल से बढ़ा कर 70 साल करने पर विचार कर रही है. जिससे डाक्टरों की कमी को कम करने मे मदद मिले. सरकार के इस फैसले से पीएमएस (प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ) नाखुश है.

पीएमएस ने कहा है कि सरकार लगातार हम लोगों की मांगों को अनदेखा करने के साथ ही जो सुविधाएं पहले डाक्टरों को मिलती थीं उसे लगातार कम किया जा रहा है. डाक्टरों और उनकी फैमली की सुरक्षा के लिए सरकार की तरफ कोई सुविधा नहीं है. किसी भी मरीज की मौत होने पर हमेशा डाक्टर को ही जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है. इन्हीं वजहों से अब कोई डाक्टर सरकारी संस्थानों में नहीं आना चाहता है.


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