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यहाँ संविधान का नहीं थानेदार का क़ानून चलता है

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Jun 17 2019 6:35PM
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अम्बेडकरनगर. प्रदेश के मुखिया लगातार प्रदेश में क़ानून व्यवस्था को सुधारने के लिए पुलिस को लाख कानून का पाठ क्यों न पढ़ा रहे हों, लेकिन प्रदेश की मित्र पुलिस है कि सुधरने का नाम नहीं ले रही है. 12 वर्षीय नाबालिग बालिका को तीन दिन अपनी कैद में रखा. दुराचार करता रहा और तीन दिन बाद बालिका को गांव में छोड़ भाग गया. बालिका के परिवार वाले जब थाने पहुंचे तो पुलिस आरोपित को पकड़कर थाने लाई और बिना मुकदमा दर्ज किये चार दिन बाद छोड़ दिया और पीड़ित परिवार को थाने से भगा दिया. न्याय की आस में पीड़ित परिवार अधिकारियों की चौखट नापने के एक महीने बाद अब मुकदमा दर्ज किया गया.

मामला अम्बेडकरनगर जिले के बसखारी थाने का है. जहां भिदूढ गांव की रहने वाली 12 वर्षीय बालिका 12 मई को अपने ही गाँव के रहने वाले 50 वर्षीय भगेलू के यहां काम के बदले पैसा मांगने गई थी, मौके का फायदा उठाने के लिए भगेलू ने पैसा देने के लिए उसे अपने दूसरे घर पर बुलाया. जहां उसने उसके साथ मुंह काला किया और धमकी देकर तीन दिन तक अपनी कैद में रखा. शाम तक जब नाबालिग बालिका अपने घर नहीं पहुंची, तो घर वालों ने खोजबीन के दौरान जब गाँव के ही निवासी भगेलू से पूछा कि क्या मेरी बेटी को उसने देखा है, तब भगेलू ने कहा कि हमें अपना मोबाइल नंबर दे दो मैं भी खोजवाता हूँ. जैसे ही मिलेगी बता दूंगा, दूसरे दिन भगेलू ने बताया कि आपकी बेटी मिल गई है, मैं घर पहुंचा दूंगा. तीसरे दिन जब भगेलू बेटी को घर पहुंचाने के बजाय धमकी देकर गाँव के बाहर ही छोड़ कर भाग गया.

घर पहुँचकर बेटी ने जब आप बीती घर वालों को बताई तो सबके होश उड़ गए. पीड़ित परिवार ने जब थाने पहुँच कर शिकायत की तो पुलिस आरोपित भगेलू को पकड़ कर ले आयी. बसखारी पुलिस मुकदमा दर्ज करने के बजाय तीन दिन तक आरोपित को थाने में बिठाए रही और उसके बाद उसे छोड़ दिया और जब पीड़िता के परिवार वालों को मुकदमा लिखने की बात की. तो थाने से भगा दिया. कहा कि मुकदमा नहीं लिखेंगे, जहां जाना हो जाओ.

न्याय की आस में पीड़ित परिवार ने जिले के अधिकारी की चौखट पर अपना माथा पटकने के एक माह के बाद इस नाबालिग पीड़िता की  फरियाद अधिकारियों ने सुनी और एक महीने बाद पुलिस ने बलात्कार और धमकी का मुकदमा दर्ज किया है. वहीं पीड़िता का आरोप है कि जब हम अपने भाई के साथ थाने गए थे तो साहब ने भाई को मार कर थाने में बैठा दिया था, साथ ही वहां की महिला सिपाही पर नाबालिग पीड़िता ने दबाव बनाने आरोप लगाया है कि वो भगेलू का नाम न ले.

देश की सर्वोच्च अदालत ने ये कहा है कि थाने में रेप पीड़िता का मुकदमा जरूर लिखा जाए. ऐसे में जब नाबालिग रेप पीड़िता थाने जाती है मुकदमा लिखने के बजाय उसे थाने से भगा दिया जाए तो कहा जा सकता है कि यहां संविधान का कानून नहीं चलता, साहब यहां तो थानेदार का कानून चलता है. वहीं जब हमने पुलिस के आलाधिकारी से बात की तो उन्होंने बताया की मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है.


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