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पर्यटकों के लिए विकसित किया जाएगा इंडो-चाइना बार्डर

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Oct 22 2018 4:28PM
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पंकज राणा

देहरादून. भारत-चीन सीमा पर खाली हो चुके गांवों और पलायन कर रहे लोगों ने केन्द्र और राज्य सरकार के माथे पर चिंता की लकीर खींच दी है. आए दिन हो रही चीनी घुसपैठ से भारत-चीन सीमा की सुरक्षा के लिए सरकार चिंतित है. मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने केन्द्र के पास एक प्रस्ताव भेजा है. जिसके तहत चीन सीमा के आसपास के गांवों को फिर से बसाने की योजना बनाई है.

प्रस्ताव में उत्तराखंड सरकार ने बॉर्डर की नीति घाटी, माणा गांव, नीलांग घाटी, धारचूला समेत कई क्षेत्रों को आबाद करने का फैसला किया है. केन्द्र के पास भेजे प्रपोजल में इस क्षेत्र की बसावट को बढ़ावा देने के लिए और स्थानीय लोगों को फिर से उनके गांव में वापस लाने के लिए कई योजनाओं का भी प्रस्ताव रखा गया है. जिसमें वहां की काश्तकारी, लकड़ी की नक्काशी से सम्बंधित कुटीर उद्योग, जड़ी- बूटी, पशुपालन के साथ-साथ उनकी आजीविका को बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा.

इतना ही नहीं राज्य सरकार की योजना है कि इंडो-चाइना बॉर्डर को पर्यटन के लिए भी विकसित किया जाए. सरकार का मानना है कि बॉर्डर को देखने की लालसा देश के पर्यटकों की होती है, लेकिन उचित सुविधा, होटल्स, यातायात की व्यवस्था न होने की वजह से पर्यटक इन क्षेत्रों में नहीं जा पाते हैं. जबकि आसपास कि गांव को पर्यटक विलेज के रूप में तैयार करके इस क्षेत्र में संभावनाएं ढूंढी जा सकती हैं. इस तरह से आसपास के लोगों को आजीविका मिलेगी और इंडो-चाइना बॉर्डर भी आबाद हो जाएंगे.


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