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क्या कुछ खास है, श्रीश्री में?

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Mar 9 2019 8:01PM
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राजेन्द्र कुमार

- सुप्रीमकोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने के लिए जस्टिस इब्राहिम खफीउल्लाह, श्री श्री रविशंकर और श्री राम पंचू का एक पैनल बना दिया है.

- इस पैनल को आठ हफ्ते के अंदर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपनी होगी.

- सुप्रीमकोर्ट ने मध्यस्थता की प्रक्रिया को गुप्त रखने का भी आदेश दिया.

- यही नहीं कोर्ट ने मध्यस्थता की प्रक्रिया की रिपोर्टिंग पर भी बैन लगा दिया है.

- एक हफ्ते के भीतर मध्यस्थता की प्रक्रिया को शुरू करने के आदेश दिए गए हैं. 

- सुप्रीम कोर्ट से गठित इस पैनल को पहले चार हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट देनी होगी और आठ हफ्ते बाद अंतिम रिपोर्ट सौंपनी होगी.

अब ये तो हुआ सुप्रीमकोर्ट के आदेश और निर्देश का ब्यौरा. 

अब आते हैं पैनल में शामिल किए गए श्री श्री रविशंकर पर. अपने नाम में एक अतिरिक्त श्री लगाने वाले आध्यात्मिक गुरु रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ़ लिविंग देश विदेश में भव्य कार्यक्रम आयोजित करती है. रविशंकर के पाकिस्तान से लेकर अन्य तमाम देशों में भव्य पंचसितारा सुविधाओं वाले आश्रम हैं. भारत में भी इनके कई भव्य आश्रम हैं. देश के अधिकांश बड़े कारोबारी इनका आशीर्वाद लेने उनके इन आश्रमों में पहुंचते हैं. 

चंद सालों पहले भारत में श्रीश्री की इतनी ख्याति नहीं थी. संसार के प्रमुख कारोबारी घराने अंबानी परिवार में हुए संपत्ति के बटवारे से संबंधित विवाद को सुलझाने में उनके मध्यस्थता करने पर ही उनके बारे में भारत के मध्यवर्गीय परिवारों को पता चला. लोगों को पता चला कि तमिल अय्यर परिवार में साल 1956 में जन्में श्रीश्री रविशंकर भारत के प्रमुख कारोबारी घराने धीरूभाई अंबानी के बेटों के बीच संपत्ति के बंटवारे को रोकने की मध्यस्थता कर रहे हैं.

श्रीश्री को संगीत बहुत पसंद हैं. ऐसे निर्मल स्वभाव वाले श्रीश्री अपने तमाम प्रयासों के बाद भी अंबानी परिवार के विवाद का सकारात्मक हल नहीं खोज सके. दो भाई मुकेश और अनिल अंबानी के बीच संपत्ति का बटवारा हो गया. इन भाईयों को वह अपने धार्मिक ज्ञान से समझा नहीं सके. फिर भी उनकी ख्याति पर कोई असर नहीं पड़ा.

जो ज्ञान अंबानी परिवार का बंटवारा रोकने में सफल नहीं हुआ, उसी ज्ञान के भरोसे श्रीश्री पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अपने एक आश्रम की शुरुआत करने में सफल रहे. इस आश्रम की शुरूआत करने के दौरान उन्होंने एलान किया कि वह तालिबान और दूसरे उग्रपंथियों से बात करने को तैयार हैं. उनका यह बयान अखबारों में तो जमकर छपा, पर कोई उग्रवादी संगठन उनसे बात करने नहीं आया. 

फिर भी श्रीश्री निराश नहीं हुए और अपना पसंदीदा गाना मैं चाहूँगा मैं तुझे सांझ सवेरे गाते हुए भारत के सबसे विवादित राम मंदिर पर उन्होंने ध्यान जमाया. बीते साल उन्होंने ये ऐलान किया कि अगर अयोध्या विवाद नहीं सुलझा तो भारत में सीरिया जैसे हालात हो जाएंगे. इस बयान ने उनकी ख्याति में इजाफा किया. उन्हें उस अयोध्या में भी पहुंचा दिया, जहां वह धार्मिक गुरू होने के बाद भी नहीं पहुंचे थे. अयोध्या पहुंच कर उन्होंने वहां के धर्मगुरुओं से मुलाकात की. रामजन्म भूमि मंदिर का दर्शन किया, और यह जताने का प्रयास किया कि आजाद भारत में वही एक ऐसे धर्मगुरू हैं जो इस विवाद को सुलझाने की कुवत रखते हैं. 

भारत में अयोध्या कहां है? यह जानने के बाद श्रीश्री का ऐसा दावा करना बनता भी था, और इसे भुनाने के क्रम में श्रीश्री ने रामजन्म भूमि मंदिर का दर्शन करने के बाद लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की. फिर हमें भी श्रीश्री ने मिलने का मौका दिया. फिर राममंदिर विवाद को खत्म करने को लेकर मेरे एक सवाल के जवाब में बोले, अगर कोर्ट कहता है कि ये जगह बाबरी मस्जिद की है तो क्या लोग इस बात को आसानी और खुशी से मान लेंगे? ये बात 500 सालों से मंदिर की लड़ाई लड़ रहे बहुसंख्यकों के लिए कड़वी गोली की तरह होगी. ऐसी स्थिति में खून-ख़राबा भी हो सकता है.

उनका यह तर्क सुनकर मैंने उनसे पूछा कि क्या आपने मुख्यमंत्री जी को भी यही कहा है? क्या सीएम साहब आपके प्रयासों को आगे बढ़ाने का ऐलान करेंगे? तो श्रीश्री हंसते हुए बोले, बेटा शरारती सवाल मत करो.

अब सुप्रीमकोर्ट ने श्रीश्री को मध्यस्थता करने वाले पैनल में किस नाते रखा है? ये तो स्पष्ट नहीं हुआ है. परन्तु इतना तो तय है कि वर्ष 2016 में दिल्ली के यमुना तट पर भव्य कार्यक्रम कर उसमें प्रधानमंत्री और दिल्ली के मुख्यमंत्री को बुलवाने वाले श्रीश्री में कोई तो ऐेसी अदभुत बात है, जिसके कारण बिना किसी चर्चा के उनका नाम सुप्रीमकोर्ट ने पैनल में रखा. जबकि एनजीटी ने श्रीश्री की आर्ट ऑफ़ लिविंग पर पांच करोड़ का जुर्माना लगाया था. तब श्रीश्री ने एनजीटी का आदेश मानने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने का फ़ैसला किया था. अब उसी सुप्रीमकोर्ट ने उन पर विश्वास करते हुए देश के सबसे बड़े धार्मिक विवाद को सुलझाने की मध्यस्थता करने को कहा है. जाहिर है कि श्रीश्री में ऐसा तो कोई रसायन है, जो उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है. वह रसायन क्या है? यही स्पष्ट होना बाकी है.

(लेखक नेशनल वाइस में एसोसियेट एडीटर हैं.)


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