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भगवान शिव-शंकर के विवाह का दिन है महाशिवरात्रि

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Mar 4 2019 4:56PM
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औरैया. फागुन माह की कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. पुराणों के मुताबिक मान्यता है कि सृष्टि की रचना के समय भगवान शंकर का ब्रह्मा के रूद्र रूप में अवतरण हुआ. प्रलय के दिन भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर दिया था. इसलिए इसे महाशिवरात्रि कहा गया है.

अलग-अलग मतों के अनुसार इसी दिन भगवान शिव शंकर का विवाह हुआ था. पूरे साल के 12 शिवरात्रियों में महाशिवरात्रि का त्यौहार सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. कश्मीर में महाशिवरात्रि को हर-रात्रि और आपसी बोल चाल में हेराथ कहते हैं.

द्वापर युग का भोले शंकर का देवकली मंदिर है. सबसे अहम बात ये है कि इस मंदिर में शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ. जगदगुरु शंकराचार्य के शिष्य मंदिर के महंत सतीश पाठक 1008 जी महाराज बताते हैं कि ये मंदिर द्वापर युग का मंदिर है. कन्नौज के राजा जयचंद्र की एक बेटी थी. जिसका नाम बेटी संजोगन देवी था. राजा ने एलान किया कि जो मेरी बेटी से विवाह करेगा उसे दान स्वरूप आधा राज्य दिया जाएगा. मैनपुरी के राजा सूरज भान ने संजोगन देवी के साथ विवाह किया तब उन्हें जालौन, कानपुर देहात का आधा हिस्सा दान में मिला. संजोगन देवी इसी देवकली मंदिर पर पूजा किया करती थी. सूरज भान ने संजोगन का नाम प्यार में देवकली रख दिया. इसके बाद मंदिर का नाम देवकली पड़ा. स्वयं से प्रकट हुआ शिवलिंग प्रत्येक साल चावल के दाने के बराबर बढ़ता है. शिवलिंग पर चढ़ने वाला दूध और पानी कहां जाता है इसका पता अभी तक नहीं लग सका है.

भोले बाबा के दर्शन के लिए पूरे देश से भक्त आते हैं. महाशिवरात्रि के दिन सुबह 4 बजे से मंदिर के कपाट खोल दिए जाते हैं. भक्त सुबह से ही दर्शन के लिए पहुंचने लगते हैं.


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