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खुले मध्यमहेश्वर मंदिर के कपाट, छह माह यहीं होगी पूजा

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: May 22 2019 1:07PM
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रुद्रप्रयाग. द्वितीय केदार भगवान मध्यमहेश्वर मंदिर के कपाट आज पूर्वाह्न 11 बजकर 30 मिनट पर सिंह लग्न में वैदिक मंत्रोच्चार व पौराणिक रीति रिवाजों के साथ खोले गए. अब छह माह भगवान की पूजा अर्चना यहीं होगी. आज सुबह डोली सात बजे गौंडार से रवाना होकर मन्दिर में पहुंची.

गत रविवार को शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मन्दिर ऊखीमठ से भगवान की चल विग्रह उत्सव डोली उच्च हिमालय क्षेत्र मध्यमहेश्वर धाम के लिए रवाना हुई थी. प्रथम पड़ाव रांसी व द्वितीय पड़ाव गौंडार में रात्रि विश्राम करने के बाद डोली मध्यमहेश्वर मन्दिर परिसर में पहुंची. मंगलवार को पूर्वाह्न साढ़े छह बजे गौंडार में पुजारी बागेश लिंग द्वारा भगवान की पूजा अर्चना को गयी, जिसके बाद गौंडार के ग्रामीणों ने मांगलिक गीतों के साथ डोली को विदा किया. भगवान की डोली भोले के जयकारों के साथ धाम के लिए रवाना हुई. डोली भीमसी, वनतोली, कूनचट्टी, नानू होते हुए प्रातः साढ़े दस बजे देवदर्शनी में पहुंची. जहां पर मन्दिर समिति, प्रशासन व स्थानीय भक्तों ने फूल एवं अक्षतों से डोली का भव्य स्वागत किया. जिसके बाद स्थानीय हकूकधारी व मन्दिर समिति द्वारा कपाट खोलने की तैयारी शुरू की. करीब एक घंटे तक देवदर्शनी में विश्राम करने के बाद डोली मंदिर परिसर में पहुंची.

भगवान की डोली ने मन्दिर परिसर में स्थित पौराणिक बर्तनों का भी निरीक्षण किया. मन्दिर की एक परिक्रमा के बाद वैदिक मंत्रोच्चार, शंख ध्वनि व पौराणिक परम्परा के साथ मन्दिर के कपाट खोले गए, जिसके बाद पुजारी द्वारा भगवान को समाधि से जागृत किया गया व महाभिषेक पूजन का कार्य शुरू किया गया. फिर भगवान की भोगमूर्ति को गर्भगृह में विराजमान किया गया, जिसके साथ ही विशेष पूजा अर्चना शुरू की गयी, तत्पश्चात भक्तों ने भी भगवान का जलाभिषेक किया. इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन किए.

पंचकेदारों में भगवान मद्महेश्वर का धाम द्वितीय केदार के रूप में जाना जाता है. मद्महेश्वर मंदिर में भगवान शिव की नाभि की पूजा की जाती है. समुद्रतल से 3497 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. शीतकाल में मंदिर के कपाट बंद होने पर मद्महेश्वर की पूजा ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में होती है. मदमहेश्वर धाम से दो किमी की दूरी पर धौला क्षेत्रपाल नामक गुफा भी स्थित है.


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