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पीएम ने खूब ठोकी अपनी पीठ पर......

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Mar 28 2019 6:55PM
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किसानों के बकाए, नोटबंदी और जीएसटी का जिक्र तक नहीं किया

राजेन्द्र कुमार  

'मैं चौकीदार हूं और चौकीदार किसी के साथ नाइंसाफी नहीं करता है. लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद मेरठ में आयोजित अपनी पहली रैली में पीएम नरेन्द्र मोदी ने ये दावा किया. परन्तु उन्होंने यह नहीं बताया कि उनकी सरकार ने कितने बेरोजगार युवकों को बीते 56 महीनों में नौकरी दी. अपनी सरकार के नोटबंदी और जीएसटी जैसे ऐतिहासिक फैसलों का तो उन्होंने रैली में जिक्र तक नहीं किया. हाँ अपनी शैली में बीते 56 महीनों की तरह आज भी कांग्रेस पर वह बरसे. और कहा कि पिछले 72 वर्षों में कांग्रेस ने जिस तरह गरीबों के साथ गद्दारी की है, उसे देखते हुए ही आज देश का गरीब कह रहा है- कांग्रेस हटाओ, गरीबी अपने आप हट जाएगी. ये बोलकर पीएम मुस्कराये.

फिर अपने समर्थकों को उत्साहित करने के लिए पीएम मोदी ने कहा कि जब मैं 8-10 साल का था, तब सुना करता था कि सरकार गरीबी हटाने के बारे में बात कर रही है. जब 20-22 साल का हुआ तो इंदिरा गांधी का नारा सुना था, गरीबी हटाओ. इसके बाद की पीढ़ियों में भी कांग्रेस के 'नामदार' गरीबी हटाओ की बात करते रहे, लेकिन गरीबी हटी नहीं. अब गरीबी की क्या स्थिति है? उनकी सरकार में यह कम हुई या बड़ी? इसका जिक्र करने के बजाए पीएम मोदी ने अचानक ही अपने भाषण में किसान नेता दीनबंधु छोटू राम जी का जिक्र किया. फिर वह बोले चौधरी चरण सिंह को प्रधानमंत्री पद से हटाने में भी कांग्रेस की भूमिका थी. और इसके बाद पीएम मोदी ने अपने भाषण में यूपी की राजनीति, पुलवामा में हुए आतंकी हमले, बालाकोट की सर्जिकल स्‍ट्राइक, अंतरिक्ष की बात समेत तमाम मुद्दों पर विपक्ष को घेरा. और भूलकर भी गन्ना किसानों के बकाए का उल्लेख अपने भाषण में नहीं किया. हालांकि सबको पता है कि यूपी में गन्ना किसानों का दस हजार करोड़ रुपया अभी तक योगी सरकार ने किसानों को नहीं दिया है. इसमें आधी रकम पश्चिमी यूपी के किसानों को देनी है.

अब आते है पीएम की राजनीतिक बयानबाजी पर. पीएम ने समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल, बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन को 'सराब' कहा. उन्होंने कहा कि सपा का स, रालोद का रा और बसपा का ब से बचें, क्यों ये सेहत के लिए हानिकारक है. हालांकि, शराब में ‘श’ आता है लेकिन पीएम ने समाजवादी पार्टी के स को जोड़ते हुए अपने संबोधन में सराब का इस्तेमाल किया. पीएम के इस कथन पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने पलटवार किया. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ''आज टेली-प्रॉम्प्टर ने पोल खोल दी. 'सराब' और 'शराब' का अंतर वह लोग नहीं जानते जो नफ़रत के नशे को बढ़ावा देते हैं. 'सराब' को मृगतृष्णा भी कहते हैं और यह वह धुंधला सा सपना है जो भाजपा 5 साल से दिखा रही है, लेकिन जो कभी हासिल नहीं होता. अब जब नया चुनाव आ गया तो वह नया 'सराब' दिखा रहे हैं. अब अखिलेश पीएम पर हमला करें तो राजद कैसे खामोश रहती. राजद ने ट्वीट किया. जिसमें लिखा गया, "धत! 5 साल में 'स' और 'श' का अंतर नहीं सीखा! लो हम सिखाते हैं- शाह का श, राजनाथ का र और बुड़बक बीजेपी का ब! बन गया शराबबंदी में धड़ल्ले से बिकता गुजराती शराब!" 

शायद यही बयानबाजी कराने के लिए पीएम मोदी ने यह तुकबंदी की थी, ताकि विपक्ष उनकी सरकार के कामकाज का हिसाब न मांगे. बीते 56 महीनों में पीएम मोदी ने इस तरह की तुकबंदी कर विपक्ष को फंसाया. परन्तु आज पीएम मोदी गच्चा खा गए. सपा मुखिया अखिलेश यादव ने पीएम मोदी की तुकबंदी का सटीक उत्तर त्वरित तरीके से दिया तो बीजेपी प्रवक्ताओं की बोलती बंद हो गई. राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि पीएम मोदी ने अपनी पहली चुनावी रैली में जो भाषण दिया वह लोगों में वैसा जोश नही जगा सका. जो वर्ष 2014 में उन्होंने लोगों में जगाया था. हालाँकि आज भी पीएम मोदी पाकिस्तान, अंतरिक्ष, सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र कर साफ कर दिया है कि अबकी वह राष्ट्रवाद के नाम पर सत्ता पाने का प्रयास करेंगे. और रोजगार देने या राममंदिर निर्माण का जिक्र नहीं करेंगे. अच्छे दिन आने का सपना नहीं दिखायंगे. अब देखना है कि यह सब करते हुए पीएम मोदी अपनी अगली चुनावी रैली में विपक्ष पर हमला करने के लिए क्या मुददा उठाएंगे. और जनता में बीजेपी के प्रति घंटे जोश को बढ़ाने के लिए क्या नया जुमला लोगों के बीच उछालेंगे.

(लेखक नेशनल वाइस में एसोसियेट एडीटर हैं.)


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