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यूपी के विभाजन पर सियासत

Reported by nationalvoice , Edited by shabahat.vijeta , Last Updated: Oct 8 2018 6:27PM
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आशीष सिंह

लखनऊ. 20 करोड़ की आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी सत्ता की रोटियां सेंकना चाहती हैं. जहाँ एक तरफ आम आदमी पार्टी यूपी के चार टुकड़े करने की मांग कर रही है तो वहीं भाजपा की सहयोगी पार्टी सुहेलदेव पार्टी भी सरकार को अल्टीमेटम देते नजर आ रही है. पार्टी ने धमकी दी है कि अगर विभाजन नहीं हुआ तो गठबंधन टूटेगा.

आम आदमी पार्टी यूपी को अवध प्रदेश, पूर्वांचल, पश्चिम और  बुंदेलखंड राज्य में विभाजित करने की मांग कर रही है. तो वहीं सुहेलदेव पार्टी पश्चिमांचल, पूर्वांचल, मध्यांचल और बुंदेलखंड राज्य की बात कर रही है.

सवाल यह है कि क्या यूपी के बंटवारे से होगा यूपी का विकास? क्या 20 करोड़ की आबादी वाले राज्य में एक सीएम काफी नहीं है? क्या यूपी के बंटवारे से रुकेगा भ्रष्टाचार? क्या बढ़ जाएगी भ्रष्ट नेताओं की संख्या?

यूपी में बढ़ती बंटवारे की मांग कहीं न कहीं सभी पोलिटिकल पार्टियों की आवाज बनती जा रही है. कोई किसी तो कोई किसी नाम से यूपी के बंटवारे की मांग कर रहा है. एक तरफ आम आदमी पार्टी है जो यूपी को अवध प्रदेश, पूर्वांचल, पश्चिम व बुंदेलखंड राज्य बनाने के लिए प्रदेश भर के पार्टी कार्यकर्ताओं को हस्ताक्षर अभियान के जरिए जन समर्थन जुटाने की फ़िराक में लगी है. तो भाजपा की सहयोगी पार्टी सुहेलदेव भी बगावत की फुंकार भरते नज़र आ रही है. बंटवारा नहीं तो साथ नहीं का अल्टीमेटम दिया है.

भारतीय समाज पार्टी के महासचिव अरुण राजभर ने कहा कि भारतीय समाज पार्टी का जिस समय निर्माण हुआ उससे पहले हम लोग देखा करते थे की मां पूर्वांचल की धरती पर कल्पनाथ राय जिंदा थे, तो वह पूर्वांचल की मांग करते थे, लेकिन उनके जाने के बाद कोई इस पर अमल नहीं किया. उत्तर प्रदेश कितना बड़ा राज्य है की किसी अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा जनसंख्या यहीं है, और अगर हम  बिहार की बात करें तो उससे झारखंड अलग बना. छत्तीसगढ़ अलग बना. 3 करोड़ 4 करोड़ आबादी वाले राज्यों को अलग करके छोटे-छोटे राज्य बनें तो भारतीय समाज पार्टी चाहती है कि उत्तर प्रदेश 22 करोड़ जनता वाला राज्य है और यहां पर लॉ एंड आर्डर सही तरीके से नहीं हो पा रहा है. लोगों को न्याय नहीं मिल पा रहा है तो भारतीय समाज पार्टी चाहती है उत्तर प्रदेश को चार भागों में बांट दिया जाए.

दरअसल प्रदेश में लग रही बंटवारे की आग कोई नई नहीं है. इससे पहले भी पूर्वांचल के बंटवारे की बात कई बार उठती रही है. कभी कोई तो कभी कोई पार्टी बटवारा कर प्रदेश में अपना दबदबा कायम करने की फिराक में रही है. वहीं पूरे मामले में बीजेपी प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने बताया कि किसी भी राज्य को बनाने के लिए 2- 3 बातों का ध्यान रखना पड़ता है कि उस प्रदेश की सामाजिक स्थिति क्या है? भौगोलिक परिस्थिति क्या है? इनके आधार पर गठन होता है. हम लोग तो छोटे राज्यों के गठन के समर्थक रहे हैं लेकिन उसकी फीजिबिलिटी देख कर ही नीतिगत मामले के तहत ही निर्णय किया जा सकता है.

यूपी में बंटवारे की दास्तान कोई नई बात नहीं है कभी बसपा सुप्रीमो मायावती ने बंटवारे की बात कही तो कहीं प्रदेश के अन्य छोटी-छोटी पार्टियों ने भी बंटवारे की मांग की.


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